India-US Relations: एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो से की बात, रक्षा और ऊर्जा सहित कई मुद्दों पर चर्चा

India-US Relations: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार (13 जनवरी) को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु सहयोग, रक्षा और ऊर्जा सहित कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की

अपडेटेड Jan 13, 2026 पर 11:22 PM
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India-US Relations: एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की

India-US Relations: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार (13 जनवरी) को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। जयशंकर ने कहा कि वह और रुबियो इन मुद्दों पर आगे चर्चा करते रहने के लिए सहमत हुए हैं।

उन्होंने मंगलवार (13 जनवरी) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, "अभी-अभी विदेश मंत्री रुबियो के साथ एक अच्छी बातचीत हुई। हमने व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु सहयोग, रक्षा और ऊर्जा पर चर्चा की।" उन्होंने कहा, "इन और अन्य मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमति बनी है।"

यह टेलीफ़ोन पर बातचीत सोमवार को नई दिल्ली में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के पदभार संभालने के ठीक एक दिन बाद हुई। गोर ने कहा कि दोनों नेता अगले महीने मिल सकते हैं। तनाव को दूर कर द्विपक्षीय संबंधों को दोबारा मजबूत करने के संकेत देते हुए दिल्ली में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को कहा कि वाशिंगटन के लिए भारत जितना आवश्यक कोई अन्य देश नहीं है। दोनों पक्ष व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं।


उन्होंने एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिजों और AI पर अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन 'पैक्स सिलिका' में शामिल होने के निमंत्रण की भी घोषणा की। पदभार संभालने के कुछ ही घंटों बाद गोर द्वारा दिए गए इन बयानों को ट्रंप प्रशासन की ओर से ऐसे समय में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। जब उसने हाल के महीनों में शुल्क (टैरिफ) और H-1B वीजा को लेकर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है।

अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए गोर ने कहा, "आपके और मेरे सामने कूटनीति को फिर से परिभाषित करने का जीवन में एक बार मिलने वाला अविश्वसनीय अवसर है। इससे जो हासिल किया जा सकता है। वह इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारी साबित हो सकता है।"

उन्होंने कहा, "भारत से अधिक आवश्यक कोई साझेदार नहीं है। आने वाले महीनों और वर्षों में राजदूत के रूप में मेरा लक्ष्य एक अत्यंत महत्वाकांक्षी एजेंडे को आगे बढ़ाना है। हम इसे सच्चे रणनीतिक साझेदारों के रूप में करेंगे, जहां दोनों पक्ष अपनी ताकत, सम्मान और नेतृत्व के साथ आगे आएंगे।"

गोर ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दोस्ती सच्ची है। यह उन मतभेदों को सुलझाने में मदद करेगी, जिनके कारण पिछले दो दशकों में संबंधों का सबसे खराब दौर देखने को मिला। द्विपक्षीय संबंधों में यह गिरावट तब शुरू हुई जब ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया।

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इसमें भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल था। टैरिफ के अलावा भारत-पाकिस्तान संघर्ष को मई में समाप्त करने के ट्रंप के दावे और अमेरिका की नयी आव्रजन नीति एवं कई अन्य मुद्दों पर भी द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर तनाव देखा गया।

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