India-US trade deal : US ने भारत के साथ किए गए ट्रेड डील के फैक्ट शीट में बड़ा बदलाव किया है। इसमें क्या बदलाव किए गए हैं, ये बताते हुए लक्ष्मण रॉय ने कहा कि इस फैक्ट शीट में बताया गया है कि इस डील में कौन-कौन चीजें शामिल हैं। इस शीट में तीन नई चीजें शामिल की गई हैं। बता दें कि पहले की फैक्ट शीट में कहा गया था कि भारत अमेरिका से दाल खरीदेगा, डिजिटल सर्विस टैक्स घटाएगा और अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदनें के लिए प्रतिबद्ध होगा है। पहले की फैक्ट शीट में 500 अरब डॉलर के सामान खरीदनें के लिए Committed शब्द का इस्तेमाल किया गया था। इसको लेकर विपक्षी पार्टियों ने काफी हंगामा किया था।
नई फैक्ट शीट में हुए ये तीन बड़े बदलाव
भारत के कृषि सेक्टर के लिए एग्री इंपोर्ट, खासकर दालों की सेंसिटिविटी को देखते हुए ये बदलाव बहुत अहम हैं। मंगलवार को जारी व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में उन प्रोडक्ट्स में "कुछ खास दालों" का साफ़ तौर पर ज़िक्र था जिन पर भारत टैरिफ कम करेगा या खत्म करेगा।
फैक्ट शीट के पहले वाले वर्जन में कहा गया था "भारत सभी US इंडस्ट्रियल सामानों और US के कई तरह के फूड और एग्री प्रोडक्ट्स पर टैरिफ खत्म करेगा या कम करेगा। इसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs),लाल ज्वार,ट्री नट्स, ताज़े और प्रोसेस्ड फल,कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स और दूसरे प्रोडक्ट्स शामिल हैं।"
लेकिन अब बदले हुए पैराग्राफ में दालों का कोई ज़िक्र नहीं है। इसके बजाय,इसमें लिखा है "भारत और ज़्यादा अमेरिकी प्रोडक्ट्स खरीदने का इरादा रखता है और $500 बिलियन से ज़्यादा के U.S. एनर्जी, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी,कोयला और दूसरे प्रोडक्ट्स खरीदना चाहता है।"
सरल शब्दों में कहें तो अमेरिका ने जो नई फैक्ट शीट जारी की है उसमें बताया गया है कि संशोधित फैक्ट शीट में दाल शामिल नहीं है। यानी, भारत द्वारा US से खरीदे जाने वाले प्रोडक्ट में दाल शामिल नहीं है। पहले एग्रो प्रोडक्ट में दाल भी शामिल था। नई फैक्ट शीट में डिजिटल सर्विस टैक्स घटाने की बात भी हटा दी गई है। अब कहा गया है कि डिजिटल सर्विस टैक्स को बेहतर किया जाएगा और इसमे आ रही परेशानियों को दूर किया जाएगा।
साथ ही 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने वाली शर्त में Committed की जगह Intend शब्द का इस्तेमाल किया गया है। यानी भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, यानी भारत की ऐसी कोई मजबूरी नहीं है, बल्कि वह ऐसा करने की कोशिश करेगा। नई फैक्ट शीट से ये भी साफ हो गया है कि भारत डिजिटल सर्विस टैक्स घटाने या हटाने के लिए बाध्य नहीं है।