Indian Army: अब पहाड़ों में छिपे दुश्मन भी होंगे नेस्तनाबूद, स्वदेशी ओवरहॉल से शारंग तोप फिर पूरी तरह तैयार

ओवरहॉल के दौरान तोप की पूरी तकनीकी जांच की गई, जरूरी जगहों पर सटीक मरम्मत की गई और अहम हिस्सों को दुरुस्त किया गया। इसमें तोप का बैरल, रिकॉइल सिस्टम और फायर-कंट्रोल से जुड़े पुर्जे शामिल थे। सेना के सूत्रों के मुताबिक, इस सावधानी से की गई प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि लंबे समय तक फायरिंग के दौरान तोप की सटीकता, संतुलन और मजबूती बनी रहे

अपडेटेड Dec 29, 2025 पर 5:48 PM
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स्वदेशी ओवरहॉल से शारंग तोप फिर पूरी तरह तैयार, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर बरसाए थे बम

भारतीय सेना की ताकत अब और भी बढ़ने वाली है। ऑपरेसन सिंदूर में कमाल का प्रदर्शन करने वाली शारंग तोप पर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय सेना ने 155 मिमी शारंग तोप को एक बड़े ओवरहॉल के बाद फिर से पूरी तरह चालू कर दिया है। यह काम टीम 506 आर्मी बेस वर्कशॉप ने किया। इस ओवरहॉल के बाद अब ये तोप दुशमन पर मौत बनकर बरेसेगी। 

ऑपरेशन सिंदूर में हुआ था इस्तेमाल

बता दें कि शारंग तोप ऑपरेशन सिंदूर में भी इस्तेमाल की गई थी। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इस अभियान के दौरान शारंग तोप की तैनाती ने यह साबित किया कि लंबी दूरी से सटीक और ताकतवर तोपखाने की फायरिंग युद्ध की तैयारी और सुरक्षा के लिए कितनी जरूरी होती है

किया गया ओवरहॉल 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ओवरहॉल के दौरान तोप की पूरी तकनीकी जांच की गई, जरूरी जगहों पर सटीक मरम्मत की गई और अहम हिस्सों को दुरुस्त किया गया। इसमें तोप का बैरल, रिकॉइल सिस्टम और फायर-कंट्रोल से जुड़े पुर्जे शामिल थे। सेना के सूत्रों के मुताबिक, इस सावधानी से की गई प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि लंबे समय तक फायरिंग के दौरान तोप की सटीकता, संतुलन और मजबूती बनी रहे। 155 मिमी शारंग तोप, पुरानी बोफोर्स तोप का उन्नत रूप है। यह 35 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हाई-एक्सप्लोसिव और खास किस्म के गोला-बारूद दागने में सक्षम है। यह तोप सामान्य इलाकों के साथ-साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी तरीके से काम करती है। इसकी तेज प्रतिक्रिया, ज्यादा मारक क्षमता और भरोसेमंद सटीकता इसे भारतीय सेना की तोपखाना ताकत का एक अहम हिस्सा बनाती है।


आत्मनिर्भरता की ओर सेना का बड़ा कदम

अधिकारियों के अनुसार, मैदान में तैनाती के दौरान मिले अनुभवों को सीधे तौर पर रखरखाव और अपग्रेड की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। यह सफल ओवरहॉल 506 आर्मी बेस वर्कशॉप के कर्मचारियों की मेहनत, तकनीकी ज्ञान और पेशेवर क्षमता को दिखाता है। यह काम सेना की स्वदेशी रखरखाव और उपकरणों  को संभालने की बढ़ती क्षमता को भी सामने लाता है। इस पहल से सेना की युद्ध तैयारी मजबूत हुई है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारत को और मजबूती मिली है। साथ ही, इससे अहम तोपखाने के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भी कम होती है।

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