पुलेला गोपीचंद ने अपनी मेहनत से बदली एकेडमी की तस्वीर, तो साइना नेहवाल और पीवी सिंधु ने जीता मैडल
पुलेला गोपीचंद ने अपनी मेहनत से बदली एकेडमी की तस्वीर, तो साइना नेहवाल और पीवी सिंधु ने जीता मैडल
खेल की दुनिया में कामयाबी हासिल करना जितना मुश्किल होता है, उससे कहीं ज्यादा चुनौती भरा होता है उस कामयाबी के बाद भी अपने खेल से जुड़े रहना और आने वाली जनरेशन के लिए कुछ करना। पुलेला गोपीचंद की कहानी भी ऐसे ही सफर से जुड़ी है। बैडमिंटन कोर्ट पर देश का नाम रोशन करने के बाद उन्होंने अपना एक्सपीरियंस नई जनरेशन के खिलाड़ियों के साथ बांटने का फैसला किया। लेकिन कोच के रूप में आगे बढ़ने का उनका यह सफर कई उतार चढ़ाव से होकर गुजरा।
घर गिरवी रखकर शुरू किया बड़ा सपना
पुलेला गोपीचंद ने जब अपनी बैडमिंटन एकेडमी शुरू करने का फैसला किया, तब उनके लिए इसे पूरा करना आसान नहीं था। 2007-08 के दौरान एकेडमी की इमारत का कुछ हिस्सा तैयार हो चुका था, लेकिन कोर्ट बनाने और बाकी काम पूरा करने के लिए पैसों की जरूरत थी। जब उन्हें उम्मीद के मुताबिक मदद नहीं मिली, तो उन्होंने अपने हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित घर को गिरवी रखकर करीब 3 करोड़ रुपये का लोन लिया।
कामयाबी के बाद भी आया ये मुश्किल समय
एक समय ऐसा था जब गोपीचंद एक बड़े बैडमिंटन खिलाड़ी के तौर पर लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। फैंस उनसे ऑटोग्राफ लेने और मिलने के लिए उत्साहित रहते थे। लेकिन एकेडमी शुरू करने के दौरान उन्हें कई बार लोगों से मिलने के लिए इंतजार करने को कहा गया और कुछ जगहों पर उन्हें पहले जैसा सहयोग भी नहीं मिला। इस दौर ने उन्हें निराश जरूर किया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।
कोच बनने से पहले जीते बड़े खिताब
कोच बनने से पहले गोपीचंद खुद बैडमिंटन कोर्ट पर देश के लिए कई उपलब्धियां हासिल कर चुके थे। उनकी सबसे बड़ी कामयाबियों में 2001 में ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतना शामिल है। इससे पहले 1998 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने दो मेडल जीते थे। खेल में उनके योगदान को देखते हुए 1999 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
एकेडमी से निकले बड़े शटलर
गोपीचंद का मकसद सिर्फ एक बैडमिंटन एकेडमी बनाना नहीं था, बल्कि ऐसी जगह तैयार करना था जहां देश के युवा खिलाड़ी बेहतर ट्रेनिंग ले सकें। उनकी एकेडमी से कई ऐसे खिलाड़ी सामने आए, जिन्होंने आगे चलकर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई। इनमें साइना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा किदांबी श्रीकांत और पारुपल्ली कश्यप भी इस एकेडमी से जुड़े रहे हैं।
ओलंपिक में भी दिखा एकेडमी का असर
गोपीचंद की मेहनत का असर बड़े मंच पर भी देखने को मिला। उनकी एकेडमी से ट्रेनिंग लेने वाली साइना नेहवाल ने 2012 के लंदन ओलंपिक में बैडमिंटन का ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद 2016 के रियो ओलंपिक में पीवी सिंधु ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस तरह गोपीचंद की एकेडमी ने भारतीय बैडमिंटन को दो ओलंपिक मेडलिस्ट दिए।
सालों की मेहनत के बाद गोपीचंद एकेडमी में कई बदलाव हुए हैं। आज यहां खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के साथ उनकी फिटनेस और खेल से जुड़ी जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाता है। मॉडर्न फैसिलिटीज और बेहतर ट्रेनिंग की वजह से यह एकेडमी भारतीय बैडमिंटन के लिए अहम जगह बन चुकी है।
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।