INS Taragiri: हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत...दुश्मन का दिल दहलाने उतरे INS अरिदमन और INS तारागिरी

INS Taragiri : ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच निश्चित तौर पर यह भारत का धमाका माना जा सकता है। अब हिंद महासागर में भारत की मजबूती और बढ़ी है। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह रेस्क्यू ऑपरेशन हो या मानवीय सहायता देना हो। हमारी नेवी हमेशा सबसे आगे रहती है। INS तारागिरी की कमीशनिंग से हमारी नेवी की ताकत और बढ़ेगी

अपडेटेड Apr 03, 2026 पर 3:55 PM
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‘तारागिरी’ उसी नाम के पुराने युद्धपोत का एडवांस्ड वर्जन है

भारतीय नौसेना का ताकत में आज बड़ा इजाफा हुआ है। बता दें कि, एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी (F41) शुक्रवार को विशाखापत्तनम में इंडियन नेवी में शामिल हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापटनम में इसे नौसेना को सौंपा। ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच निश्चित तौर पर यह भारत का धमाका माना जा सकता है। अब हिंद महासागर में भारत की मजबूती और बढ़ी है। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह रेस्क्यू ऑपरेशन हो या मानवीय सहायता देना हो। हमारी नेवी हमेशा सबसे आगे रहती है। INS तारागिरी की कमीशनिंग से हमारी नेवी की ताकत और बढ़ेगी।

बता दें कि ‘तारागिरी’ उसी नाम के पुराने युद्धपोत का एडवांस्ड वर्जन है, जिसने 1980 से 2013 तक नौसेना में सेवा दी थी। नई ‘तारागिरी’ हाईटेक स्टेल्थ तकनीक, बेहतर मारक क्षमता, अत्याधुनिक ऑटोमेशन और मजबूत सर्वाइवेबिलिटी से लैस है।

भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा 


वहीं इस मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना का लक्ष्य बिल्कुल साफ है - एक ऐसी सेना बने रहना जो हर समय युद्ध के लिए तैयार, भरोसेमंद, एकजुट और भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम हो। उन्होंने बताया कि इसी दिशा में काम करते हुए, रक्षा मंत्रालय के सहयोग से भारतीय नौसेना ने पिछले एक साल में 12 युद्धपोत, 1 पनडुब्बी और 1 विमान स्क्वाड्रन को सेवा में शामिल किया है। एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार, आज शामिल किया गया नया जहाज़ नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा। इससे समुद्र में उसकी पहुंच, मौजूदगी और तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता पहले से ज्यादा मजबूत होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘तारागिरी’ जहाज़ भारत की आत्मनिर्भरता का एक बड़ा उदाहरण है। यह जहाज़ आधुनिक तकनीक और मजबूत युद्ध क्षमता से लैस है। खास बात यह है कि इसमें 75 प्रतिशत से ज्यादा सामान भारत में ही बना है। इसके अलावा, इस जहाज़ का निर्माण भी तेजी से किया गया है। अपनी श्रेणी के अन्य जहाज़ों की तुलना में इसे करीब 15 प्रतिशत कम समय में तैयार किया गया है, जो भारतीय रक्षा निर्माण की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

तारीगिरी की खासियत

बता दें कि, तारागिरी को मझगांव डॉक शिप बिल्डिंग लिमिटेड ने प्रोजेक्ट 17-ए के तहत तैयार किया है। वॉरशिप में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, एमएफस्टार(रडार), मीडियम रेंज सर्फेस टु एयर मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम लगा हुआ है। इसके अलावा यह 76 मिमी गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम के साथ एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो से भी लैस है।

न्यूक्लियर सबमरीन 'अरिदमन' 

वहीं भारत की स्वदेशी न्यूक्लियर सबमरीन 'अरिदमन' को भी नेवी में शामिल किया गया। इसमें आठ K-4 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं जिनकी रेंज 3500 किलोमीटर है या फिर 24 K-15 मिसाइलें जिनकी रेंज 750 किलोमीटर है। इससे भारत की समुद्री न्यूक्लियर ताकत बहुत बढ़ जाएगी. पनडुब्बी का हल्का डिजाइन इसे और चुपके से चलने में मदद करेगा।

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