भारत की तेल रिफाइनरी कंपनियां अब फिर से ईरान से तेल खरीदने की तैयारी कर रही हैं। इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने कुछ समय के लिए ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे दी है, ताकि जंग के कारण पैदा हुई ऊर्जा की कमी को कम किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, भारत की तीन रिफाइनरी कंपनियों ने कहा है कि वे ईरानी तेल खरीदना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें सरकार के निर्देश और अमेरिका से पेमेंट जैसी शर्तों पर साफ जानकारी का इंतजार है।
Reuters के मुताबिक, भारत के पास तेल का स्टॉक दूसरे एशियाई देशों की तुलना में कम है, इसलिए उसने हाल ही में रूस से ज्यादा तेल खरीदना शुरू कर दिया था। अब सैंक्शन में ढील मिलने के बाद ईरान से भी खरीदारी की योजना बन रही है।
समुद्र में पड़ा है करोड़ों बैरल तेल
रिपोर्ट में कहा गया है कि जानकारों के मुताबिक, इस समय करीब 130 से 170 मिलियन बैरल ईरानी तेल समुद्र में जहाजों पर पड़ा हुआ है।
यह तेल मिडिल ईस्ट से लेकर चीन के आसपास के समुद्री इलाकों तक फैला हुआ है। यह मात्रा इतनी है कि इससे कुछ दिनों तक सप्लाई की कमी को पूरा किया जा सकता है।
एशिया अपनी जरूरत का करीब 60% कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से लेता है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद होने की वजह से कई रिफाइनरी कंपनियों को अपना काम धीमा करना पड़ रहा है और ईंधन का निर्यात भी घटाना पड़ रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में ईरान पर सख्त सैंक्शन लगाए थे, जिसके बाद ज्यादातर देशों ने वहां से तेल खरीदना बंद कर दिया था। इसके बाद चीन ईरान का सबसे बड़ा ग्राहक बन गया, क्योंकि उसे सस्ता तेल मिल रहा था।
ईरान से तेल खरीदना अभी भी आसान नहीं है। क्योंकि पेमेंट कैसे होगा, इस पर कोई साफ नियम नहीं हैं। कई जहाज पुराने और “शैडो फ्लीट” का हिस्सा हैं। कुछ कंपनियों के पुराने कॉन्ट्रैक्ट भी रुकावट बन सकते हैं।
एक ट्रेडर के मुताबिक, इन सब चीजों को ठीक करने में समय लगता है, लेकिन कंपनियां जल्दी से जल्दी खरीद शुरू करने की कोशिश करेंगी।
कौन-कौन खरीदता था ईरानी तेल?
सैंक्शन से पहले ईरान से तेल खरीदने वाले बड़े देशों में भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, इटली, ग्रीस, ताइवान और तुर्की शामिल थे।
अब हालात बदल रहे हैं और अगर सैंक्शन में ढील जारी रहती है, तो भारत समेत कई देश फिर से ईरान से तेल खरीदना शुरू कर सकते हैं।