Iran Strait of Hormuz News: ईरान जंग से होर्मुज में तेल और गैस के टैंकर जहां-तहां फंसे हैं। ईरान के डर से कोई भी होर्मुज पार करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा। अमेरिका से लेकर इजरायल होर्मुज को खोलने को बेताब हैं। हालांकि भारत ने भी इस मार्ग से अपने तीन जहाज लाए, लेकिन इसके लिए न तो भारत ने कोई डील नहीं बल्कि कूटनीतिक रास्ता अपनाया। मध्य-पूर्व में अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरानी नौसेना ने कूटनीतिक बातचीत के बाद एक भारतीय एलपीजी टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दी।
ईरानी नेवी ने ली पूरी जानकारी
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज पर मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, यह टैंकर उन दो भारतीय जहाजों में शामिल था जिन्हें पहले से तय रास्ते से इस संवेदनशील क्षेत्र से गुजरने की इजाजत मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस यात्रा के दौरान जहाज लगातार ईरानी नौसेना के संपर्क में रहा और उससे जुड़ी पूरी जानकारी, जैसे झंडा, कहां से आया, कहां जा रहा है और क्रू की पहचान, मांगी गई। बताया गया कि जहाज पर सभी सदस्य भारतीय थे। इसके बाद उसे एक तय रास्ते से आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।
भारत ने चुना कूटनीति का रास्ता
रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआत में भारत के लिए दोनों देशों को साधना आसान नहीं था। खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उस दौरान कम से कम 3 बार अपने ईरानी समकक्ष से फोन पर बात की। इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन से बात की। इन्हीं बातचीत में होर्मुज का रास्ता निकला। नई दिल्ली में ईरान के राजदूत ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई।
चुने जहाजों को गुजरने के अनुमति दे रहा ईरान
ईओएस रिस्क ग्रुप के सलाहकार प्रमुख मार्टिन केली के अनुसार, ईरान होर्मुज से सिर्फ कुछ चुने हुए जहाज़ों को ही गुजरने की अनुमति दे रहा है और वह भी पूरी जांच-पड़ताल के बाद, जो आमतौर पर जहाजों के उसके जलक्षेत्र में प्रवेश करते समय की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही जहाजों को आने-जाने दिया जा रहा है, लेकिन इसका ज्यादा फायदा ईरान को ही मिल रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि दुनिया भर के तेल का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।
एक अधिकारी के मुताबिक, जब भारतीय टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहा था, तब ईरानी नौसेना रेडियो के जरिए लगातार उनके संपर्क में थी। भारतीय टैंकर को आगे बढ़ने की अनुमति मिलने से पहले करीब दस दिनों तक फारस की खाड़ी में लंगर डालकर इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद 13 मार्च की रात उसे आगे जाने की इजाजत मिली। जलडमरूमध्य में जाने से पहले जहाज के क्रू ने संभावित खतरे को देखते हुए पूरी तैयारी कर ली थी, जिसमें लाइफ राफ्ट्स को तैयार रखना भी शामिल था। यह सफर आसान नहीं था, क्योंकि टैंकर को अपनी पहचान छिपाने के लिए ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद करके चलना पड़ा।जैसे ही भारतीय टैंकर होर्मुज के खतरनाक जोन से बाहर निकला और ओमान की खाड़ी में पहुंचा, वहां भारतीय नौसेना के जहाज पहले से ही इंतजार कर रहे थे। वहां से भारतीय नौसेना ने टैंकर को एस्कॉर्ट किया और सुरक्षित भारत की ओर रवाना किया।