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2026 में तेल की औसत कीमत 130 डॉलर रहने पर 0.8% घट सकती है भारत की GDP ग्रोथ - S&P ग्लोबल रेटिंग्स

वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल रेटिंग्स का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP ग्रोथ रेट उसके बेस केस अनुमान 7.1 फीसदी से नीचे गिर सकती है। 2026 में तेल की औसत कीमत 130 डॉलर रहने पर भारत की GDP ग्रोथ 0.8 फीसदी घट सकती है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Apr 14, 2026 पर 3:26 PM
2026 में तेल की औसत कीमत 130 डॉलर रहने पर 0.8% घट सकती है भारत की GDP ग्रोथ - S&P ग्लोबल रेटिंग्स
S&P का अनुमान है कि मिडिल-ईस्ट संघर्ष की तीव्रता जल्द ही अपने चरम पर पहुंच जाएगी और होर्मुज़ स्ट्रेट से जुड़ी बाधाएं अप्रैल में ही कम हो जाएंगी

S&P ग्लोबल रेटिंग्स का कहना है कि अगर मध्य-पूर्व संघर्ष के चलते ऊर्जा संकट बना रहता है और 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल पर रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 में भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 0.8 फीसदी तक धीमी हो सकती है। इस ग्लोबल रेटिंग एजेंसी की राय है कि अगर तेल की ऊंची कीमतें और आपूर्ति में रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP ग्रोथ रेट उसके 7.1 फीसदी के बेस-केस अनुमान से नीचे गिर सकती है।

S&P ग्लोबल का मानना है कि स्ट्रेस सिनेरियो में 2026 में तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल और 2027 में लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल रहेगी। इसकी तुलना में बेस केस में 2026 के बाकी समय में कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल और 2027 में 70 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है।

S&P की राय है कि तेल-गैस की कीमतों में बढ़त से घरों, कंपनियों और बैंकों पर बोझ बढ़ेगा। साथ ही सरकार के राजकोषीय मजबूती के प्रयास में भी मुश्किल होगी। हालांकि, उसका यह भी कहना है कि ईंधन की कीमतों में अचानक उछाल से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए उठाए गए कदमों के कारण पब्लिक फाइनेंस में आने वाली कोई भी गिरावट अस्थाई होगी।

निगेटिव जोखिमों के बावजूद, भारत के मैक्रोइकोनॉमिक और फाइनेंशियल फंडामेंटल्स इतने मज़बूत हैं कि वे किसी भी झटके को झेल सकें। इससे सरकार, बैंकों या रेटेड कॉर्पोरेट्स की क्रेडिट गुणवत्ता पर तत्काल कोई असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

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