हवाई सफर पर 'फ्यूल सरचार्ज' की मार, जेट फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से इंडिगो ने बढ़ाया किराया; जानिए कितना चुकाना होगा एक्स्ट्रा

IndiGo Hikes Fares: जेट फ्यूल की कीमतें पिछले एक महीने में दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं, जिसका सीधा असर किराए पर पड़ा है। किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का 40% हिस्सा केवल ईंधन (ATF) का होता है। युद्ध के कारण पश्चिमी देशों की उड़ानों को लंबे रास्ते लेने पड़ रहे हैं, जिससे तेल की खपत और ज्यादा बढ़ गई है

अपडेटेड Apr 02, 2026 पर 8:33 AM
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नए नियम 2 अप्रैल यानी आज से होने वाली सभी बुकिंग्स पर लागू होंगे

IndiGo: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने हवाई किराए पर 'फ्यूल सरचार्ज' में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों में आए वैश्विक उछाल के बाद एयरलाइन ने अपनी लागत की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। यात्रियों को अब घरेलू उड़ानों के लिए ₹950 और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ₹10,000 तक एक्स्ट्रा चुकाना होगा। नए नियम 2 अप्रैल यानी आज से होने वाली सभी बुकिंग्स पर लागू होंगे।

दूरी के हिसाब से लगेगा चार्ज

इंडिगो ने घरेलू रूट्स पर दूरी के आधार पर अलग-अलग स्लैब बनाए हैं। अब यात्रियों को टिकट बुक करते समय अतिरिक्त चार्ज देना होगा:


500 किमी तक: ₹275 प्रति सेक्टर

501 से 1,000 किमी: ₹400

1,001 से 1,500 किमी: ₹600

1,501 से 2,000 किमी: ₹800

2,000 किमी से अधिक: ₹950

इससे पहले 14 मार्च से एयरलाइन ₹425 से ₹2,300 के बीच सरचार्ज वसूल रही थी, जिसे अब नए सिरे से तय किया गया है।

इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए देना होगा ₹10,000 तक एक्स्ट्रा

अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर जेट फ्यूल की कीमतें पिछले एक महीने में दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं, जिसका सीधा असर किराए पर पड़ा है। भारतीय उपमहाद्वीप के देशों के लिए न्यूनतम ₹900 का सरचार्ज दें होगा। वहीं ब्रिटेन और यूरोपीय देशों की उड़ानों के लिए यह चार्ज ₹10,000 तक पहुंच गया है।

ATF कीमतों में 130% के बजाय सिर्फ 25% की बढ़ोतरी!

हवाई यात्रियों को अचानक एक बड़े झटके से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया है। वैश्विक स्तर पर युद्ध के कारण एयरलाइंस के लिए ATF की कीमतें 130% तक बढ़ने वाली थीं, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू एयरलाइंस के लिए इसे केवल 25% तक ही सीमित रखा है। हालांकि, यह राहत केवल भारतीय घरेलू परिचालन के लिए है। विदेशी एयरलाइंस और चार्टर उड़ानों को ₹2.07 लाख प्रति किलो लीटर की पूरी अंतरराष्ट्रीय दर चुकानी होगी। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इसे एक 'व्यावहारिक और दूरदर्शी' कदम बताया है, ताकि घरेलू कनेक्टिविटी और व्यापार पर बुरा असर न पड़े।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण ईंधन की कीमतें बेतहाशा बढ़ी हैं। किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का 40% हिस्सा केवल ईंधन (ATF) का होता है। युद्ध के कारण पश्चिमी देशों की उड़ानों को लंबे रास्ते लेने पड़ रहे हैं, जिससे तेल की खपत और ज्यादा बढ़ गई है।

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