West Bengal Election Results 2026: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के कुछ दिनों बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी कोलकाता में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की मेजबानी करने वाली हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार (6 मई) को कहा कि सुप्रीम कोर्ट को पश्चिम बंगाल चुनाव का संज्ञान लेना चाहिए। सपा मुखिया ने यह भी कहा कि बंगाल में हुए मतगणना के CCTV फुटेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
यादव ने पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों पर चिंता जताई है। अखिलेश आज यानी 6 मई को ममता से मिलने कोलकाता जाने वाले हैं। अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद चिंता जताते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव में 'बहुस्तरीय चुनावी माफिया' काम करेगा।"
बंगाल चुनाव को लेकर बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में यादव ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट को पश्चिम बंगाल चुनाव का संज्ञान लेना चाहिए। मतगणना के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए।" इस दौरान अखिलेश ने कहा, "मैं पश्चिम बंगाल जा रहा हूं।" टीएमसी प्रमुख के इस्तीफा देने से इनकार करने पर सपा मुखिया ने कहा, "BJP ने वोटों की लूट की और चुनावों में धांधली की। दीदी इस्तीफ़ा क्यों दें?"
इससे एक दिन पहले अखिलेश यादव ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों को लेकर BJP पर कटाक्ष करते हुये आरोप लगाया कि नतीजे मनमाने ढंग से तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का चयन भी इसी के अनुरूप होगा। यादव ने X पर एक पोस्ट में कहा, "पश्चिम बंगाल में जब परिणाम मनमर्जी से निकाला गया है तो भाजपाई परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री भी मनमर्जी से ही बनेगा।"
यादव की टिप्पणी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के पश्चिम बंगाल में सत्ता खोने के बाद आई है। तृणमूल सरकार के गिरने के बाद राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के लिए सरकार बनाने का रास्ता साफ हुआ है। अखिलेश ने बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया था।
ममता का इस्तीफा देने से इनकार
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। ममता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश है। बनर्जी के इस फैसले से राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है जिसको लेकर संविधान में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। साथ ही इससे राजनीतिक टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
BJP द्वारा 207 सीट जीतकर 294 सदस्यीय विधानसभा में निर्णायक बहुमत हासिल करने और राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत करने के एक दिन बाद बनर्जी ने नतीजों को साजिश करके गढ़ा हुआ बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग से लड़ रही थी, BJP से नहीं। तृणमूल को सिर्फ 80 सीट ही मिल सकीं।
उन्होंने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा, "मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं। जनादेश लूटा गया है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?" उन्होंने कहा, "मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं बल्कि एक साजिश से हुई है... मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी।"
बनर्जी ने मतगणना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट की लूट हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ने के लिए मतगणना की गति जानबूझकर धीमी की गई। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मतगणना केंद्र के अंदर लात मारी गई, धकेला गया और बदसलूकी की गई।
उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय बल के जवान मतगणना केंद्रों के बाहर गुंडों जैसा व्यवहार कर रहे थे। संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव हारने के बाद किसी मुख्यमंत्री द्वारा पद छोड़ने से इनकार करने की स्थिति की कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी।