Israel US Iran War : US-इजरायल और ईरान के बीच जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ शुरू हुई जंग आज चौथे दिन में पहुंच गई है। अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद हालात बहुत तेजी से बिगड़े हैं। वहीं अब जंग का असर पूरी दुनिया पर दिखने लगा है और भारत में इससे अछूता नहीं है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत के पास अब सिर्फ 25 दिनों का क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल का स्टॉक बचा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच मंगलवार को सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत के पास फिलहाल करीब 25 दिनों के लिए पर्याप्त कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है। सरकार ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी के आयात के लिए नए और वैकल्पिक स्रोत भी तलाश रही है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और कच्चे तेल, LPG और LNG के लिए वैकल्पिक देशों से बातचीत कर रही है, ताकि सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए।
दरअसल, ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया है। भारत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत तेल अन्य स्रोतों से आयात किया जाता है। भारत अपने मौजूदा समझौतों के अनुसार रूस से भी कच्चा तेल मंगाता रहा है।
सूत्रों के अनुसार, फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी करने की कोई तत्काल योजना नहीं है। यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा मीडिया को देश की तैयारियों और मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी देने के बाद सामने आई है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की जारी जानकारी के अनुसार, भारत दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा आयातक, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है। मिडिल ईस्ट में किसी भी अल्पकालिक रुकावट से निपटने के लिए देश के पास कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोल, डीज़ल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) जैसे जरूरी ईंधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
सरकार ने देशभर में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और भंडार पर नजर रखने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम बनाया है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की रिलीज के अनुसार, फिलहाल देश के पास पर्याप्त स्टॉक है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मिडिल ईस्ट में हाल ही में बढ़े तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। यह टकराव वीकेंड में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद शुरू हुआ था। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी। इसके बाद ईरान ने सऊदी अरब, कतर और दुबई जैसे खाड़ी देशों में जवाबी हमले किए।