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Justice Ujjal Bhuyan: 'वोटिंग से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी'; SIR विवाद पर बोले जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

SIR Row: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा है कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया, जिसके कारण लाखों भारतीय नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित हो जाएं और दूसरे दर्जे के नागरिक बन जाएं, वह संविधान की मूल भावना पर ही चोट करती है। उनकी यह बड़ी टिप्पणी भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आई है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Oct 05, 2026 पर 8:30 AM
Justice Ujjal Bhuyan: 'वोटिंग से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी'; SIR विवाद पर बोले जस्टिस उज्ज्वल भुइयां
SIR Row: जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि लाखों भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी है

SIR Row: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने रविवार (4 अक्टूबर) को कहा कि लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया को किसी भी तरह की दलीलों के जरिये उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था को नकारती है। जस्टिस भुइयां ने कहा कि चाहें अरबपति हो या रिक्शा चलाने वाला हो। दोनों के वोट की कीमत बराबर होती है।

जस्टिस भुइयां रविवार को हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह टिप्पणी भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आई है।

'मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया भारतीय संविधान का सीधा उल्लंघन होगी'

जस्टिस भुइयां ने 'नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ' में आयोजित 19वीं जस्टिस बोध राज साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन कार्यक्रम में कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता, जिनमें से एक वर्ग मताधिकार प्राप्त हो और दूसरा मताधिकार से वंचित हो। उन्होंने कहा कि व्यापक पैमाने पर भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया भारतीय संविधान के आर्टिकल 326 और 14 का सीधा उल्लंघन होगी।

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