सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है, जिनमें सरकार के उस निर्देश को चुनौती दी गई है, जिसमें दुकानदारों को कांवड़ यात्रा के रूट पर पड़ने वाले अपने ढाबे, होटल और रेस्टोरेंट पर QR कोड लगाने को कहा गया है, जिन्हें स्कैन करके मालिकों के नाम और उनकी पहचान का पता लगाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार के क्यूआर कोड लगाने के निर्देश का उद्देशय होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के मालिकों के नाम और पहचान को उजागर करना है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शिक्षाविद अपूर्वानंद झा और अन्य लोगों की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने यूपी की योगी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट में किसने क्या कहा?
Bar & Bench के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा एक नया आवेदन दायर किया गया है। हम उस पर अपना जवाब दाखिल करेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा आवेदन समयबद्ध है। इसे अगले हफ्ते प्रस्तुत किया जा सकता है।
इस पर वकील ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य के पास कोई शक्ति या तंत्र नहीं है। जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि हम इस पर सुनवाई करेंगे, कोई समस्या नहीं। अगले मंगलवार को हम इसे अपने पास रखेंगे।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश की ओर से जारी इसी तरह के निर्देशों पर रोक लगा दी थी, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले होटल और ढाबे वालों को अपने मालिकों, कर्मचारियों और दूसरी डिटेल लिख कर लगाने के लिए कहा गया था।
याचिकाकर्ता अपूर्वानंद झा ने उत्तर प्रदेश प्रशासन की 25 जून को जारी की गई एक प्रेस रिलीज का हवाला देते हुए कहा, “नए उपायों में कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी होटल ढाबों के लिए QR कोड लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि मालिकों के नाम और पहचान का पता चले लेकिन इस तरह की भेदभावपूर्ण नीति पर न्यायालय पहले ही रोक लगा चुका है।”
याचिका में आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार का निर्देश दुकान, ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश में स्टॉल मालिकों से ‘कानूनी लाइसेंस आवश्यकताओं’ के तहत धार्मिक और जातिगत पहचान बताने को कहा गया है।
हिंदू कैलेंडर के ‘श्रावण’ माह में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेकर अलग-अलग जगहों से कांवड़ लेकर आते हैं। अनेक श्रद्धालु इस महीने में मांसाहार से परहेज करते हैं और अनेक लोग प्याज तथा लहसुन युक्त भोजन भी नहीं खाते।