कर्नाटक सरकार ने वापस लिया स्कूल-कॉलेज में हिजाब बैन का फैसला, छात्रों को बुर्का, कलावा और पगड़ी पहनने की अनुमति

Karnataka Hijab Ban Revokes: यह नया नियम इसी शैक्षणिक सत्र (Academic Year 2026-27) से लागू हो जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि छात्र अपनी पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2022 में उडुपी के एक कॉलेज से हुई थी, जहां कुछ मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर क्लास में आने से रोका गया था

अपडेटेड May 13, 2026 पर 7:29 PM
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कर्नाटक सरकार ने वापस लिया स्कूल-कॉलेज में हिजाब बैन का फैसला (PHOTO- AI)

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में ड्रेस कोड को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला किया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने साल 2022 में भाजपा शासन के दौरान लगाए गए हिजाब बैन के आदेश को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है। नए आदेश के अनुसार, अब कक्षा 1 से 12वीं तक के छात्र और छात्राएं अपनी निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीक पहन सकेंगे।

हिजाब और स्कार्फ: मुस्लिम छात्राओं को अब कक्षाओं में हिजाब या सिर पर स्कार्फ पहनने की अनुमति होगी।

पगड़ी (Turban): सिख समुदाय के छात्रों के लिए पगड़ी पहनने की छूट को स्पष्ट किया गया है।

धार्मिक धागा (जनीवारा/कलावा): हिंदू छात्रों के लिए जनीवारा (यज्ञोपवीत) और कलावा पहनने पर अब कोई रोक नहीं होगी।

रुद्राक्ष: छात्र अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार रुद्राक्ष भी पहन सकेंगे।


कब से लागू होगा नियम?

यह नया नियम इसी शैक्षणिक सत्र (Academic Year 2026-27) से लागू हो जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि छात्र अपनी पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

क्या था हिजाब विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2022 में उडुपी के एक कॉलेज से हुई थी, जहां कुछ मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर क्लास में आने से रोका गया था।

तत्कालीन भाजपा सरकार ने 5 फरवरी 2022 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि स्कूलों में केवल निर्धारित यूनिफॉर्म ही पहनी जाएगी और हिजाब की अनुमति नहीं होगी।

मार्च 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस बैन को बरकरार रखा था, यह कहते हुए कि हिजाब इस्लाम का 'अनिवार्य हिस्सा' नहीं है।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां दो जजों की बेंच ने अलग-अलग राय दी (Split Verdict), जिससे यह मामला बड़ी बेंच के पास लंबित हो गया था।

क्या था सरकार का तर्क?

कर्नाटक सरकार का कहना था कि यह फैसला छात्रों की गरिमा और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए लिया गया है। हाल ही में कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे CET) के दौरान छात्रों के जनीवारा (पवित्र धागा) कटवाने और हिजाब हटवाने की घटनाओं की काफी निंदा हुई थी, जिसके बाद सरकार ने इस दिशा में सख्त कदम उठाए हैं।

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