दक्षिण कन्नड़ जिले के बेलथांगडी में एक कॉलेज छात्रा की अपहरण की कोशिश और हमले की शिकायत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और गहन पूछताछ के बाद पता चला कि यह पूरी कहानी मनगढ़ंत थी और लड़की ने खुद को चोट पहुंचाकर ये पूरा नाटक रचा था। सोमवार को एक नाबालिग छात्रा ने पुलिस से शिकायत की कि जब वह अपने स्कूटर से कॉलेज जा रही थी, तब कार सवार तीन नकाबपोश लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की।
लड़की का दावा था कि उन लोगों ने उसका अपहरण करने की कोशिश की गई और उस पर चाकू से हमला कर घायल कर दिया। लड़की ने यह भी कहा कि अपहरणकर्ता उसका बैग छीनकर भाग गए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय विधायक हरीश पुंजा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत अस्पताल पहुंचे। इलाके में डर का माहौल बन गया था, इसलिए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। छात्रा ने बताया था कि कार की नंबर प्लेट कपड़े से ढकी हुई थी।
CCTV और बयानों ने खोल दी पोल
पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज खंगाले, तो वहां कोई संदिग्ध कार नहीं दिखी। इसके अलावा जब पुलिस ने कार के रंग और सही लोकेशन के बारे में पूछा, तो छात्रा बार-बार अपनी बात बदलने लगी।
वहीं मेडिकल जांच में डॉक्टरों ने पाया कि लड़की को आई चोटें बहुत मामूली थीं और वे खुद से भी लगाई जा सकती थीं।
इतना ही नहीं जांच में पता चला कि लड़की ने अपनी किताबें घर के पास खुद ही जला दी थीं और दावा किया कि अपहरणकर्ता उन्हें ले गए।
पुलिस की कड़ी पूछताछ के बाद छात्रा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह गांव के इस कॉलेज में पढ़ाई नहीं करना चाहती थी। वह चाहती थी कि उसका एडमिशन मंगलुरु शहर के किसी बड़े कॉलेज में हो जाए। अपने माता-पिता पर दबाव बनाने और पढ़ाई छोड़ने के बहाने उसने यह पूरा ड्रामा रचा।
दक्षिण कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक डॉ. अरुण के. ने बताया, "लड़की ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने झूठ बोला था, क्योंकि वह बेलथांगडी के कॉलेज में नहीं पढ़ना चाहती थी। उसने खुद को चोट पहुंचाई और कहानी गढ़ी। हमने लड़की की काउंसलिंग की है और मामले को बंद कर दिया गया है।"
एक चश्मदीद ने भी पहले छात्रा की कहानी का समर्थन किया था, लेकिन बाद में उसने कबूल किया कि उसने वही कहा जो लड़की ने उसे बोलने के लिए कहा था।