Housing Scheme : कर्नाटक सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण का एक और बड़ा तोहफा देने का ऐलान कर दिया है। हाउसिंग स्कीम के तहत अल्पसंख्यकों समुदाय का कोटा 5 प्रतिशत बढ़ा दिया है। आवास योजना के तहत मुस्लिमों का कोटा 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया गया है। यह आरक्षण तालुका स्तर पर दिया जाएगा, न कि गांव स्तर पर।
राज्य सरकार ने बढ़ाई आरक्षण की सीमा
राज्य के कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने बताया कि यह आरक्षण मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिख, जैन और पारसी समुदायों के लिए लागू होगा। उन्होंने साफ किया कि इस कोटे में किसी तरह का आंतरिक आरक्षण नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि, "केंद्र सरकार की ओर से भी ऐसे निर्देश मिले हैं। सच्चर समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि अल्पसंख्यक समुदायों की हालत काफी खराब है। इसलिए, आवास की सुविधा से वंचित बड़ी आबादी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।"
मुस्लिम समुदाय के लिए बढ़ाया हाउसिंग आरक्षण
संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि यह फैसला "मुस्लिम समर्थक" है, क्योंकि मुस्लिम समुदाय इन सभी अल्पसंख्यक समूहों में सबसे बड़ी संख्या में है। उन्होंने कहा, "अगर सरकार बेघर लोगों को घर देने की कोशिश कर रही है, तो इसमें राजनीतिक मकसद क्यों देखा जा रहा है?" इस फैसले पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार की आलोचना की। बीजेपी विधायक अरविंद बेलाड ने कहा, "धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाएगी और जनता सही समय पर इसका जवाब देगी। हम इस मुद्दे को विधानसभा में जरूर उठाएंगे।"
आवास विभाग के एक दस्तावेज के अनुसार, कर्नाटक में 2017 से बसवा ग्रामीण आवास योजना, वाजपेयी शहरी आवास योजना और डी. देवराज उर्स विशेष आवास योजना के तहत अल्पसंख्यकों को 10% आरक्षण दिया जा रहा था। बाद में, जब एच.डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस-जेडी(एस) गठबंधन की सरकार थी, तब बनी एक कैबिनेट उप-समिति ने इस आरक्षण को बढ़ाकर 15% करने का सुझाव दिया। इसके लिए पहले कानून और वित्त विभाग की राय ली गई। कानून विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जबकि वित्त विभाग ने अंतिम निर्णय का अधिकार आवास विभाग को दे दिया।