भारत-पाकिस्तान सीजफायर समझौते का करतारपुर कॉरिडोर पर क्या होगा असर? समझिए

India-Pakistan Conflict: विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बीते दिन एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा कि कॉरिडोर 'मौजूदा सुरक्षा परिदृश्यों के कारण अगले निर्देशों तक निलंबित रहेगा

अपडेटेड May 10, 2025 पर 8:35 PM
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अगले निर्देशों तक निलंबित रहेगा करतारपुर कॉरीडोर

Kartarpur Corridor: भारत और पाकिस्तान के बीच फिलहाल सीजफायर समझौता हो गया है। इसका मतलब ये है कि, दोनों देशों के बीच अब संघर्ष विराम हो गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये समझौता बिना किसी शर्त के हुआ है और समझौते के लिए पाकिस्तान ने भारत से अप्रोच किया। अब सवाल ये है कि संघर्ष विराम के बाद करतारपुर साहिब कॉरीडोर का क्या होगा? क्या उसे खोल दिया जाएगा?

आपको बता दें कि, भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे सैन्य टकराव को देखते हुए सुरक्षा स्थिति के कारण करतारपुर साहिब में सेवाएं निलंबित कर दी गई थी।

अगले निर्देशों तक निलंबित रहेगा करतारपुर कॉरीडोर

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बीते दिन ये घोषणा की थी कि मौजूदा सुरक्षा स्थिति के कारण करतारपुर साहिब में सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कॉरिडोर 'मौजूदा सुरक्षा परिदृश्यों के कारण अगले निर्देशों तक निलंबित रहेगा।' बुधवार की सुबह भारत के सैन्य ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के अधिकारियों ने पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक में कॉरिडोर को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया। निलंबन के बावजूद कई श्रद्धालु ऐतिहासिक तीर्थस्थल पर दर्शन की उम्मीद में सुबह-सुबह गलियारे पर पहुंचे। हालांकि, उन्हें सुरक्षा कर्मियों ने वापस भेज दिया और मौजूदा सुरक्षा चिंताओं के कारण वापस जाने को कहा।

भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर समझौता बिना किसी शर्त के हुआ है। यानी की इस समझौते से पहले जो भी निर्णय लिए गए उनपर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसीलिए करतारपुर कॉरिडोर सरकार के अगले आदेश तक बंद ही रहेगा।

क्या है करतारपुर कॉरिडोर?


करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन 9 नवंबर 2019 को गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के अवसर पर किया गया था। यह भारतीय तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान में दरबार साहिब गुरुद्वारा तक वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा प्रदान करता है, जो सिख धर्म के संस्थापक का अंतिम विश्राम स्थल है। भारत और पाकिस्तान के बीच समझौते के तहत सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन 5000 तीर्थयात्री मंदिर में जा सकते हैं।

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