दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह सजा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दी गई है। इसके अलावा उनकी दो साथियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की जेल की सजा दी गई है। इन तीनों को पहले ही ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ नाम के संगठन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी माना गया था। यह एक प्रतिबंधित संगठन है, जो जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता था।
यह मामला कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी और उग्रवादी नेटवर्क के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है। इस सज़ा से साफ होता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की एकता को लेकर सख्त रुख अपना रही है। साथ ही यह भी दिखाता है कि ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और सजा का सामना करना पड़ता है।
भारत-विरोधी गतिविधियों के चलते DeM पर बैन
‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ (DeM) कश्मीर का एक महिलाओं का संगठन है, जिसकी शुरुआत 1987 में हुई थी। इसकी प्रमुख आसिया अंद्राबी हैं। केंद्र सरकार ने 2004 में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद 2018 में एनआईए ने आसिया अंद्राबी को गिरफ्तार किया था। संगठन ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर UAPA के तहत जारी नोटिफिकेशन की कॉपी मांगी थी। साथ ही यह भी अनुरोध किया था कि उसका नाम ‘आतंकी संगठनों’ की सूची से हटाया जाए।
हालांकि, कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कानून में दिए गए सही विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया है। अपने 2023 के आदेश में कोर्ट ने बताया कि UAPA के चैप्टर VI की धारा 35 के तहत संगठनों को ‘सूची’ में शामिल करने की प्रक्रिया तय होती है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 36 के अनुसार कोई भी संगठन अपना नाम इस सूची से हटवाने के लिए केंद्र सरकार के पास आवेदन कर सकता है, लेकिन याचिकाकर्ता ने इस प्रक्रिया को नहीं अपनाया।
यह मामला पाकिस्तान और आतंकी संगठनों की मदद से देश के खिलाफ साजिश और युद्ध जैसी गतिविधियों से जुड़ा है। साल 2021 में दिल्ली की एक कोर्ट ने आसिया अंद्राबी और उनकी साथियों—फहमीदा और नसरीन—के खिलाफ IPC और सख्त कानून UAPA के तहत केस चलाने का आदेश दिया था। यह फैसला तब लिया गया, जब आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वे मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं। कोर्ट ने उनके खिलाफ IPC की कई धाराओं में आरोप तय किए, जिनमें आपराधिक साजिश, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना और उसकी साजिश करना, राजद्रोह, अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाना, देश की एकता के खिलाफ बयान देना और सार्वजनिक अशांति फैलाने जैसे आरोप शामिल हैं।