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कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर कैसे पहुंची मस्जिद? अब यहां एंट्री पर लगी रोक...जानें बांकड़ा मस्जिद का पूरा इतिहास

बताया जाता है कि यह मस्जिद 130 साल से भी ज्यादा पुरानी है। यह मस्जिद हवाई अड्डे के दूसरे रनवे से करीब 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। विमानन अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद की मौजूदा जगह की वजह से दूसरे रनवे के विस्तार का काम प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही उड़ानों के संचालन और एडवांस इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) लगाने में भी देरी हो रही है

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Jul 13, 2026 पर 4:18 PM
कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर कैसे पहुंची मस्जिद? अब यहां एंट्री पर लगी रोक...जानें बांकड़ा मस्जिद का पूरा इतिहास
कोलकाता की पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद (बांकड़ा मस्जिद) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के भीतर स्थित 130 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद (बांकड़ा मस्जिद) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। एयरपोर्ट प्रशासन ने मस्जिद में आने वाले लोगों के एंट्री पास पर रोक लगा दी है और फिलहाल वहां नमाज भी बंद करा दी गई है। वजह है एयरपोर्ट के दूसरे रनवे का विस्तार और उससे जुड़े सुरक्षा मानक। वहीं इस मस्जिद के चर्चा में आने के बाद एक बार फि ये सवाल उठ रहे हैं कि, आखिर एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी जोन के भीतर मस्जिद पहुंची कैसे? आइए जानते हैं विस्तार से

130 साल पुरानी है मस्जिद

बता दें कि, पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित 130 साल से अधिक पुरानी बांकड़ा मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को धर्म से जोड़कर नहीं, बल्कि एयरपोर्ट के विकास और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के नजरिए से देखा जाना चाहिए। मीडिया से बातचीत में सामिक भट्टाचार्य ने कहा, "यह मंदिर या मस्जिद का मामला नहीं है। अगर उस जगह पर मस्जिद की बजाय मंदिर भी होता, तब भी उसे जरूरत पड़ने पर दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता था।"

बताया जाता है कि यह मस्जिद 130 साल से भी ज्यादा पुरानी है। यह मस्जिद हवाई अड्डे के दूसरे रनवे से करीब 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। विमानन अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद की मौजूदा जगह की वजह से दूसरे रनवे के विस्तार का काम प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही उड़ानों के संचालन और एडवांस इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) लगाने में भी देरी हो रही है। यह सिस्टम खास तौर पर सर्दियों में घने कोहरे के दौरान विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए जरूरी माना जाता है।

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