Kolkata Airport Mosque: कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर बनी 130 साल पुरानी मस्जिद हटाने की तैयारी, शुभेंदु सरकार ने शुरू की पहल

Kolkata Airport Mosque: पश्चिम बंगाल सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर मौजूद करीब 130 साल पुरानी मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं। यह मस्जिद नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे के काफी करीब है

अपडेटेड May 28, 2026 पर 2:27 PM
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Kolkata Airport Mosque Row: यह मस्जिद नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे के काफी करीब है

Kolkata Airport Mosque: पश्चिम बंगाल में नवगठित भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार अब कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर मौजूद करीब 130 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट विस्तार और सुरक्षा कारणों की वजह से यह कदम उठाया जा रहा है। यह मस्जिद कोलकाता इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे के काफी करीब है। अधिकारियों का कहना है कि इसकी वजह से रनवे विस्तार और खराब मौसम में विमान लैंडिंग के लिए जरूरी नई तकनीक लगाने में दिक्कत हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, यह मस्जिद एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे से करीब 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद की मौजूदा जगह रनवे विस्तार में बड़ी बाधा बन रही है। साथ ही खराब मौसम, खासकर सर्दियों के घने कोहरे में विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए जरूरी आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) लगाने में भी दिक्कत आ रही है।

रनवे के पास है मस्जिद


ठीक रनवे के पास 136 साल पुरानी बांकड़ा मस्जिद (गौरीपुर जामे मस्जिद) स्थित है। अधिकारियों ने News18 को बताया कि मस्जिद की वजह से पहले रनवे के टचडाउन प्वाइंट (जहां विमान जमीन पर उतरता है) को करीब 88 मीटर दक्षिण की ओर शिफ्ट करना पड़ा था। ताकि DGCA और ICAO के सुरक्षा नियमों का पालन किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस मस्जिद की मौजूदगी रनवे के विस्तार में बाधा डालती है। उड़ानों के संचालन को भी प्रभावित करती है।

पहले इसे हटाने में क्यों आ रही थी दिक्कत?

यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील माना जाता रहा है। बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट विस्तार की योजना कई सालों से अटकी हुई थी क्योंकि मस्जिद को हटाना राजनीतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील मुद्दा माना जाता रहा है। पहले की सरकारों ने भी इसे हटाने से बचने की कोशिश की थी। 1950 और 1960 के दशक में एयरपोर्ट विस्तार के दौरान आसपास के कई गांवों को हटाया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों ने मस्जिद को न छूने की शर्त पर ही जमीन खाली करने की सहमति दी थी।

मुस्लिम समुदाय को नया ऑफर

इसके बाद कई सरकारों ने मस्जिद को हटाने का फैसला टाल दिया। साल 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने मस्जिद को शिफ्ट करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। वहीं, 2003 में केंद्र और राज्य सरकार ने रनवे को दूसरी दिशा में बढ़ाने का फैसला लिया, जिससे अतिरिक्त खर्च और सड़क डायवर्जन करना पड़ा। अब एयरपोर्ट प्रशासन ने प्रस्ताव दिया है कि हवाईअड्डे के बाहर एक नई और बड़ी मस्जिद बनाई जाए। इस मामले में मस्जिद कमेटी और कुछ मुस्लिम संगठनों के साथ बातचीत भी हुई है।

हाई-सिक्योरिटी जोन में आती है मस्जिद

फिलहाल यह मस्जिद एयरपोर्ट के हाई-सिक्योरिटी जोन में आती है, जिसकी सुरक्षा CISF के हाथ में है। यहां नमाज पढ़ने आने वाले लोगों को पहले सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है। फिर विशेष शटल सेवा के जरिए अंदर ले जाया जाता है। हाल ही में संसद में इस मुद्दे पर चर्चा और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की नई जांच के बाद मामला फिर से सामने आया। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की कोशिश एयरपोर्ट सुरक्षा, रनवे विस्तार और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाकर समाधान निकालने की है।

जमीयत उलेमा के अध्यक्ष का विरोध

मस्जिद को दूसरे जगह शिफ्ट करने को लेकर सिद्दीकुल्लाह चौधरी विरोध जता रहे हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और राज्य जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी का कहना है कि इस मामले में कोई भी निर्णय अल्पसंख्यक संगठनों के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, "यह 136 साल पुरानी मस्जिद है। 1962 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बांकड़ा गांव के लोगों से कहा था कि वे दूसरे स्थान पर चले जाएं। लेकिन मस्जिद वहीं रहेगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। तब से वहां नमाज पढ़ी जा रही है। अब मस्जिद को शिफ्ट करने के संबंध में बैठकें की जा रही हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ तीन-चार बैठकें हो चुकी हैं।"

सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने आगे कहा, "हमने उनसे साफ कहा है कि मुसलमान अपने हाथों से मस्जिद न तो तोड़ेंगे और न ही उसे किसी को सौंपेंगे। समाधान के लिए हमने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और दारूल उलूम देवबंद जैसे मान्यता प्राप्त संगठन इस पर राय दें। यदि कोई समाधान निकलेगा तो उन्हीं के माध्यम से निकलेगा। हम यहां रहते हैं और अगर हमसे मस्जिद तोड़ने के लिए कहा जाएगा तो यह स्वीकार नहीं होगा।"

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मस्जिद की वजह से एयरपोर्ट संचालन में आने वाली समस्या को लेकर उन्होंने कहा, "1962 से अब तक 63 साल हो चुके हैं। लेकिन इस मुद्दे पर सही तरीके से बातचीत नहीं की गई। 10 साल पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी से बातचीत हुई थी। अब फिर बैठकें की जा रही हैं। बीते बुधवार को डीएम, एडीएम, एयरपोर्ट अथॉरिटी, CISF, सिक्योरिटी डायरेक्टर और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के साथ हमारी बैठक हुई थी।"

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