Korba: प्रकृति की गोद में बसी है काले हीरे की ये धरती, यहां की जमीन भारत के लिए गेम चेंजर से कम नहीं

जानकारी के मुताबिक, कोरबा का औद्योगिक विकास तब शुरू हुआ जब यहां पहला पावर प्लांट लगाया गया। इसके बाद एनटीपीसी और बालको जैसी बड़ी कंपनियों के आने से कोरबा को ऊर्जा का बड़ा केंद्र बना दिया गया। आज यहां से पूरे देश को बिजली सप्लाई की जाती है

अपडेटेड May 24, 2025 पर 9:37 PM
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आज का कोरबा जो पूरे देश को रोशनी देता है

छत्तीसगढ़ का कोरबा शहर 25 मई को अपने 27वें साल में कदम रख चुका है। देखने में 27 साल किसी शहर के लिए एक छोटा समय लगता है पर जंगलों, पहाड़ों और यहां रहने वाली पहाड़ी कोरवा जनजातियों के जरिए, इस शहर की पहचान काफी पहले ही बच चुकी थी। आज का कोरबा जो पूरे देश को रोशनी देता है, कभी वहां सिर्फ आदिवासी जीवन की सादगी और शांति बसी थी। आइए जानते हैं इस शहर के बारे में।

कभी यहां चारों ओर था  जंगल

साल 1941 में जब पहली बार कोरबा की जमीन पर कोयला मिला, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि यही कोयला, जिसे लोग 'काला हीरा' कहते हैं, एक दिन भारत की ऊर्जा का बड़ा आधार बनेगा। कोयले की खोज ने यहां औद्योगिक विकास की शुरुआत की और धीरे-धीरे इस धरती पर बिजली बनाने वाले बड़े-बड़े संयंत्र लग गए। कोरबा, जो कभी शांत और हरियाली से भरा था, अब देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने वाला प्रमुख शहर बन गया है।


ऐसे पड़ा कोरबा नाम

पुरातत्व विशेषज्ञों की माने तो ‘कोरबा’ नाम यहां की एक संरक्षित जनजाति ‘कोरवा’ के नाम से लिया गया है। पहाड़ी कोरवा जनजाति कोरबा की असली आत्मा मानी जाती है। इनका जीवन हमेशा से जंगलों से जुड़ा रहा है, और आज भी यह गहरा रिश्ता वन क्षेत्रों में देखने को मिलता है, जहां अब भी आधुनिक जीवन की रफ्तार नहीं पहुंच पाई है।

मिनी भारत भी है उर्जा का ये केंद्र

जानकारी के मुताबिक, कोरबा का औद्योगिक विकास तब शुरू हुआ जब यहां पहला पावर प्लांट लगाया गया। इसके बाद एनटीपीसी और बालको जैसी बड़ी कंपनियों के आने से कोरबा को ऊर्जा का बड़ा केंद्र बना दिया गया। आज यहां से पूरे देश को बिजली सप्लाई की जाती है। यहां उद्योगों के बढ़ने से जब रोजगार के नए मौके बने, तो देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां आकर बसने लगे। आज कोरबा में बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बंगाल, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। इसी वजह से कोरबा को ‘मिनी भारत’ भी कहा जाता है।

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