ममता बनर्जी की पार्टी TMC को एक बड़ा झटके लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को साफ कर दिया कि चुनाव आयोग (EC) को वोटों की गिनती वाले केंद्रों पर अधिकारियों को चुनने का पूरा अधिकार है। सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि अगर काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग एजेंट दोनों ही केंद्र सरकार के अधिकारी हों, तो सिर्फ इसी वजह से नियमों को गलत नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट ने साफ किया कि काउंटिंग के लिए केंद्र या राज्य-दोनों में से किसी भी सरकार के अधिकारी चुने जा सकते हैं।
जस्टिस बागची ने कहा कि जब यह विकल्प खुला है, तो इसे नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनाव आयोग चाहे तो दोनों अधिकारी एक ही श्रेणी (जैसे केंद्र सरकार) से भी चुन सकता है, इसमें कोई गलत बात नहीं है।
इन टिप्पणियों के बाद तृणमूल कांग्रेस ने अपना रुख बदल दिया और अब चुनाव आयोग के नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की। वहीं चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सभी गाइडलाइन्स का ठीक से पालन हो रहा है।
काउंटिंग में संतुलन का दावा
चुनाव आयोग की तरफ से पेश वकील डीएस नायडू ने कहा कि व्यवस्था इस तरह बनाई गई है कि अगर काउंटिंग सुपरवाइजर केंद्र सरकार का होगा, तो काउंटिंग एजेंट राज्य सरकार का होगा।
TMC की आपत्तियां क्या थीं
TMC ने पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 4 मई को होने वाली मतगणना के लिए केंद्र सरकार और PSU के कर्मचारियों की तैनाती को सही ठहराया गया था।
TMC की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में चार बड़ी आपत्तियां रखीं:
कुल मिलाकर, कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराया और साफ कर दिया कि अधिकारियों की तैनाती का अंतिम अधिकार उसी के पास है।