कहते हैं राजनीति में 'स्थायी' कुछ भी नहीं होता- न कुर्सी, न रसूख और न ही वो प्रतीक जिन्हें हम अमर मान लेते हैं। तमिलनाडु की सत्ता के गलियारों से आज जो तस्वीर निकलकर सामने आई, उसने लोकतांत्रिक राजनीति के सबसे कठोर सच को एक झटके में बयां कर दिया। 2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने तमिलनाडु में दशकों पुराने द्रविड़ दुर्ग को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री की कुर्सी से एमके स्टालिन की विदाई और सचिवालय में नए चेहरों की दस्तक के साथ ही 'सफाई' का दौर शुरू हो चुका है।
ऐसी ही एक तस्वीर चेन्नई के सचिवालय (Secretariat) से आई है, जहां मुख्यमंत्री स्टानिलन की मेज पर कभी दिवंगत नेता एम करुणानिधि की चमचमाती सुनहरी मूर्ति गर्व से शोभा बढ़ाती थी, उसे वहां से हटाने में प्रशासन को एक सेकंड का भी वक्त नहीं लगा। कल तक जो मूर्ति सत्ता का केंद्र और गौरव का प्रतीक थी, आज वह महज एक 'वस्तु' की तरह मेज से एक झटके में उठा कर हटा दी गई है।
सचिवालय की मेज से करुणानिधि की मूर्ति का हटाया जाना केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह सत्ता बदलने का संकेत भी है। न्यूज एजेंसी PTI ने एक वीडियो शेयर किया, सचिवालय के कर्मचारी DMK नेताओं का सामान हटा रहे हैं, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की तस्वीर भी शामिल है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में DMK की हार के बाद मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफा सौंप दिया राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने एमके स्टालिन और उनकी मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता बदलती है, सचिवालयों की दीवारों के रंग, मेजों पर रखे फ्रेम और सरकारी दफ्तरों में लगी तस्वीरें सबसे पहले बदलती हैं।
द्रविड़ राजनीति में मूर्तियां और प्रतीक हमेशा से भावनाओं से जुड़े रहे हैं। करुणानिधि की मूर्ति का हटना इस बात का प्रतीक है कि 'उगते सूरज' (DMK) का समय फिलहाल ढल चुका है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सभी को चौंका दिया, जहां पहली बार चुनाव लड़ने वाले एक्टर विजय की TVK 108 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। TVK ने एक ही झटके में द्रविड़ राजनीति को खत्म कर दिया। DMK 59 और AIADMK 47 सीटों पर सिमट गईं।