Lalit Modi: सोशल मीडिया पर विजय माल्या के साथ खुद को 'भारत के दो सबसे बड़े भगोड़े' बताकर सुर्खियां बटोरने वाले ललित मोदी अब बैकफुट पर या गए है। वीडियो वायरल होने और चौतरफा आलोचना के बाद, आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ने सोमवार को भारत सरकार से 'बिना शर्त माफी' मांग ली है। उन्होंने सफाई दी कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और उनका इरादा भारतीय संस्थानों का अपमान करना कभी नहीं था।
एक वीडियो से शुरू हुआ पूरा मामला
पूरा विवाद पिछले हफ्ते शुरू हुआ जब विजय माल्या के जन्मदिन के जश्न का एक वीडियो सामने आया। ललित मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक क्लिप शेयर की जिसमें वे माल्या के साथ नजर आ रहे है। वीडियो में मोदी खुद को और माल्या को मजाकिया लहजे में 'भारत के दो सबसे बड़े भगोड़े' (Two biggest fugitives of India) कहते सुनाई दे रहे है। उन्होंने पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा था, 'चलो भारत में इंटरनेट को फिर से हिला देते हैं। जन्मदिन मुबारक मेरे दोस्त विजय माल्या। लव यू।'
इस वीडियो आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। यूजर्स ने आरोप लगाया कि ये दोनों गंभीर कानूनी कार्रवाइयों का मजाक उड़ा रहे हैं और भारतीय व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे है।
'सरकार के प्रति सर्वोच्च सम्मान'
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा आर्थिक अपराधियों की वापसी की प्रतिबद्धता दोहराए जाने के बीच, ललित मोदी ने 'X' पर एक लंबा पोस्ट लिखकर माफी मांगी। मोदी ने कहा, 'मेरा इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था, खासकर भारत सरकार को, जिसके प्रति मेरे मन में सर्वोच्च सम्मान और आदर है।' उन्होंने तर्क दिया कि उनके बयान को 'गलत समझा गया' और उसकी जिस तरह से व्याख्या की गई, उनका वह मतलब कभी नहीं था। अंत में उन्होंने 'माफी' मांगते हुए इस विवाद को खत्म करने की अपील की।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, प्रत्यर्पण के बढ़ते दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब होती छवि को देखते हुए ललित मोदी ने यह बचाव का रास्ता चुना है। हालांकि, भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स अब भी उनके 'भगोड़े' वाले बयान को एक भद्दे मजाक के तौर पर ही देख रहे हैं।
विजय माल्या पर साधी चुप्पी
दिलचस्प बात यह है कि अपनी माफी में ललित मोदी ने भारत सरकार के प्रति तो सम्मान दिखाया, लेकिन उस वीडियो या माल्या के साथ अपनी दोस्ती पर उठ रहे सवालों पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं की। बता दें कि फिलहाल वे और विजय माल्या दोनों ही ब्रिटेन में हैं और भारत सरकार उनके प्रत्यर्पण की कोशिशों में जुटी है।