सरकार ने मंगलवार को लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें रखी गई हैं। यह जानकारी न्यूज 18 को एक सरकारी सर्कुलर से मिली है। यह बिल सांसदों के साथ शेयर कर दिया गया है और इसे संसद के आगामी विशेष सत्र में 16 अप्रैल से पेश किया जाएगा।
सरकार अलग से यह भी बदलाव लाएगी कि महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 2029 से पहले लागू हो जाए। अभी यह आरक्षण 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (सीटों की नई सीमा तय करने) के बाद लागू होने वाला था।
संविधान के अनुसार अभी राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सीटें हो सकती हैं, लेकिन परिसीमन आयोग ने कुल 543 सीटें तय कर रखी हैं। सरकार ने सांसदों के बीच संविधान (131वां संशोधन) बिल भी सर्कुलेट कर दिया है।
हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने एक बिल को मंजूरी दी है, जिसमें लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33% आरक्षण जल्दी देने का प्रावधान है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्ष इस प्रस्ताव का विरोध करने वाला है। विपक्ष कह रहा है कि सरकार लोकसभा और विधानसभाओं की सीटें करीब 50% बढ़ाकर महिलाओं के आरक्षण को इससे जोड़ रही है। वे इसे महिलाओं के बिल के नाम पर परिसीमन (delimitation) थोपने की कोशिश बता रहे हैं।
विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा है कि सरकार ने पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में ही महिलाओं का आरक्षण लागू करने की उनकी मांग ठुकरा दी थी, अब अचानक यह "जल्दबाजी" क्यों?
यह संविधान संशोधन बिल पास होने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए। सरकार के पास अकेले इतने वोट नहीं हैं, इसलिए विपक्ष का समर्थन जरूरी होगा।
हालांकि, बिल में OBC महिलाओं के लिए आरक्षण के अंदर आरक्षण का प्रावधान नहीं है, जो एक और बड़ा विवाद का मुद्दा है।