LPG crisis: एलपीजी सिलेंडर की कमी के बाद वैकल्पिक रास्ता अपना रहे रेस्तरां-होटल, ऑर्डर में धीरे-धीरे हो रहा सुधार

LPG Shortage in india: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते तेल संकट की खबरों के बीच देश के कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर कमर्शियल LPG सिलेंडर लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी गई। एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में आई भारी कमी से तमिलनाडु और कर्नाटक का होटल और रेस्तरां उद्योग संकट में घिर गया है

अपडेटेड Mar 15, 2026 पर 1:49 PM
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LPG crisis: ईरान युद्ध की वजह से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी से प्रभावित रेस्तरांओं के ऑर्डर में अब सुधार हो रहा है

LPG Shortage in india: खाने-पीने के सामान की ऑनलाइन ऑर्डर पर डिलिवरी करने वाले प्लेटफॉर्म 'मैजिकपिन' ने राहत की खबर दी है। magicpin ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कमी से प्रभावित रेस्तरांओं के ऑर्डर में अब सुधार देखने को मिल रहा है। मैजिकपिन के संस्थापक एवं CEO  अंशू शर्मा ने कहा कि रेस्तरांओं ने अपने मेन्यू में समायोजन किया है। साथ ही वे खाना पकाने के वैकल्पिक तरीके अपना रहे हैं।

शर्मा ने कहा कि एलपीजी आपूर्ति में संकट का ज्यादातर असर छोटे रेस्तरांओं पर पड़ा है जो खाना पकाने के लिए सिलेंडर पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। उनके पास वित्तीय संसाधनों की कमी है। शर्मा ने कहा कि खाना पकाने के लिए एलपीजी पर काफी ज्यादा निर्भर रेस्तरांओं के ऑर्डर में शुरुआत में 5-10 प्रतिशत की गिरावट आई थी। लेकिन अब मांग में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि रेस्तरांओं ने एलपीजी की आपूर्ति की दिक्कतों के बीच अपने मेन्यू में कुछ बदलाव किया है। शर्मा ने कहा कि अब होटल-रेस्टोरेंट वाले इंडक्शन, लकड़ी से जलने वाले चूल्हों और इलेक्ट्रिक ओवन जैसे दूसरे तरीके अपनाएं हैं। शर्मा ने कहा कि मैजिकपिन अगले कुछ दिन में सबसे प्रभावित लगभग 10,000 रेस्तरां भागीदारों को इंडक्शन कुकिंग स्टोव बांटने की योजना बना रही है।


इससे उन्हें अपना कारोबार जारी रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि रेस्तरां सेक्टर ने इन व्यवधानों के दौरान मजबूती दिखाई है. उद्योग पर मौजूदा संकट थोड़े समय के लिए ही रहने की उम्मीद है। रेस्तरां मालिकों का कहना है कि वे इस संकट से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक ओवन और इंडक्शन कुकर जैसे विकल्प अपना रहे हैं। साथ ही उन व्यंजनों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिन्हें पकने में कम समय लगता है।

पिज्जा-ए-गुडनेस के मालिक नरेंद्र यादव ने पीटीआई से कहा, "एलपीजी की कमी ने रसोई के कामों को मुश्किल बना दिया है। कुछ व्यंजन जिन्हें पकाने में ज्यादा समय लगता है, उन्हें कम कर दिया गया है। हम जहां भी संभव है इलेक्ट्रिक ओवन और इंडक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कोई भी रेस्तरां अपना मेन्यू कम नहीं करना चाहता, लेकिन हमें रसोई को चालू रखने के लिए खुद को बदलना होगा।"

PNG कनेक्शन वालों को नहीं मिलेगी LGP

इस बीच, सरकार ने पाइप वाली रसोई गैस (PNG) का कनेक्शन रखने वाले वाले परिवारों के लिए सब्सिडी वाला एलपीजी कनेक्शन रखने या लेने पर रोक लगा दी है। ऊर्जा आपूर्ति में वैश्विक संकट के बीच, इस क्षेत्र के रेगुलेटर ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे खाना पकाने वाली गैस की आपूर्ति पर दबाव कम करने के लिए अपने PNG इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजा से विस्तार करें।

14 मार्च को जारी एक नोटिफिकेशन में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति और वितरण) विनियमन आदेश, 2000 में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत, अब PNG कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए अपना घरेलू LPG कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य हो गया है।

संशोधित आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां और वितरक उन उपभोक्ताओं को भरा गैस सिलेंडर नहीं देंगे, जिनके पास पहले से एलपीजी कनेक्शन हैं। आदेश में कहा गया, "कोई भी व्यक्ति जिसके पास पीएनजी कनेक्शन है और जिसके पास घरेलू एलपीजी कनेक्शन भी है, वह घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं रखेगा। या किसी भी सरकारी पेट्रोलियम कंपनी से या उनके डीलर के जरिए भरा हुआ एलपीजी सिलेंडर नहीं लेगा। ऐसे लोगों को तुरंत अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन 'सरेंडर' करना होगा।"

सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां संशोधित आदेश के तहत पीएनजी कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं को खाली एलपीजी सिलेंडर के बदले भरा हुआ सिलेंडर नहीं देंगी। इस कदम का मकसद उन घरों के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देना है। जिनके पास पाइप के जरिए गैस की आपूर्ति की सुविधा नहीं है।

भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी की जरूरत को आयात से पूरा करता है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और जवाबी ईरानी कार्रवाई से पहले भारत का आधे से ज्यादा कच्चे तेल का आयात, लगभग 30 प्रतिशत गैस और 85-90 एलपीजी आयात सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था।

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इस युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जो खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से कच्चा तेल मंगाकर आपूर्ति में व्यवधान को कुछ हद तक ठीक किया है। लेकिन औद्योगिक ग्राहकों को गैस आपूर्ति कम कर दी गई है। होटल और रेस्तरांओं को भी एलपीजी की उपलब्धता कम हो गई है।

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