"मुझे मेरे बेटे के पास जाने दो..." यह कहते हुए एक मां जोर-जोर से रो रही थी और खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। उस समय कई परिवार अपनों की तलाश में लखनऊ के अलीगंज स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक भवन की ओर दौड़ रहे थे। उन्हें अंदर फंसे लोगों के घबराहट भरे फोन कॉल मिल रहे थे। बिल्डिंग के बाहर मौजूद परिजन बेबस होकर देख रहे थे कि कैसे घना काला धुआं और तेज आग कोचिंग सेंटर को अपनी चपेट में ले रही है। सोमवार दोपहर हुई इस दर्दनाक घटना में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र थे।
दमकल विभाग के पहुंचने से पहले स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू कर दिया था। अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने बिल्डिंग की खिड़कियों और शीशों को तोड़ने की कोशिश की, ताकि अंदर भरा जहरीला धुआं बाहर निकल सके और फंसे लोगों को बचाया जा सके। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिल्डिंग में कई छात्र फंसे हुए थे, जो गर्मी की छुट्टियों के दौरान एनिमेशन की ट्रेनिंग लेने आए थे। छात्रों को संकट में देखकर आसपास के लोगों ने उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया।
परिवार के लोग लगा रहे थे गुहार
इस हादसे का सबसे दर्दनाक दृश्य तब सामने आया, जब आग से बचने की कोशिश में एक छात्र ऊपरी मंजिल से नीचे कूद गया। नीचे मौजूद लोगों ने तुरंत एक गद्दे जैसी व्यवस्था की, ताकि उसकी जान बचाई जा सके। छात्र के नीचे गिरते ही स्थानीय लोग उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। बिल्डिंग के बाहर का माहौल बेहद दुखद था। जैसे ही माता-पिता और रिश्तेदारों को अंदर फंसे अपने प्रियजनों के घबराए हुए फोन आए, वे घटनास्थल पर पहुंच गए। कई लोग चिंता और बेबसी में रोते-बिलखते नजर आए। कुछ महिलाएं पुलिसकर्मियों से बिल्डिंग के अंदर जाने की अनुमति मांग रही थीं, ताकि वे अपने बच्चों और परिवार के लोगों तक पहुंच सकें। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक महिला लगातार रोते हुए अधिकारियों से गुहार लगाती रही, "मुझे मेरे बेटे के पास जाने दो।"
फंसे लोग अपनों को कर रहे थे फोन
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, धीरज मेहरा अपने दोस्त आदित्य श्रीवास्तव का घबराया हुआ फोन आने के बाद तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। आदित्य एक 3डी आर्टिस्ट हैं और बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर बने गेमिंग ज़ोन में काम करते थे। धीरज मेहरा ने बताया, "आदित्य ने फोन पर मुझसे कहा, 'मुझे बचा लो।' यह सुनते ही मैं तुरंत वहां पहुंच गया।" रेस्क्यू ऑपरेशन में सेना के लांस नायक छवि राम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छवि राम आगरा में तैनात हैं और उस समय किसी काम से लखनऊ मुख्यालय आए हुए थे। आग लगने के दौरान वह उसी रास्ते से गुजर रहे थे।पीटीआई से बातचीत में छवि राम ने बताया कि उनके पेशेवर अनुभव को देखते हुए अधिकारियों ने उन्हें राहत और बचाव कार्य में शामिल किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बचाव अभियान में मदद की और इस दौरान बिल्डिंग से एक दर्जन से अधिक शवों को बाहर निकाले जाते देखा। वहीं कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी जान भी बचाई गई।
जब दमकल कर्मी आग बुझाने में जुटे हुए थे, तब आसपास के लोगों ने भी उनकी मदद की। आग से प्रभावित बिल्डिंग के पीछे रहने वाले लोगों ने राहत और बचाव कार्य में लगे दमकल कर्मियों को पानी की बोतलें उपलब्ध कराईं। घटनास्थल के दृश्यों में सुरक्षा उपकरण पहने दमकल कर्मी सीढ़ियों के सहारे बिल्डिंग पर चढ़ते नजर आए। वहीं एक अन्य टीम पास की समान ऊंचाई वाली बिल्डिंग के जरिए अंदर पहुंचने की कोशिश कर रही थी, ताकि फंसे हुए लोगों तक जल्दी पहुंचा जा सके। इस दौरान दूसरी टीमें लगातार आग पर काबू पाने में लगी रहीं। बगल की बिल्डिंग से दमकल कर्मियों ने ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए दो रास्ते तैयार किए। इसके बाद उन्होंने अंदर घुसकर बड़े स्तर पर तलाश और बचाव अभियान चलाया, ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
जानवरों की क्लिनिक तक पहुंचा आग
इस भीषण आग का असर सिर्फ ऊपर फंसे छात्रों तक ही सीमित नहीं रहा। बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक पालतू जानवरों की दुकान और क्लिनिक भी आग की चपेट में आ गया और पूरी तरह जल गया। इससे अंदर मौजूद कई जानवरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। बचाव अभियान के दौरान टीमों को जली हुई इमारत से कालिख से ढकी बिल्लियों और अन्य जानवरों को बाहर निकालते देखा गया। कुछ जानवर घायल अवस्था में मिले, जबकि कई राख और धुएं से पूरी तरह ढके हुए थे। पशु अधिकार कार्यकर्ता किरण शुक्ला ने आशंका जताई कि क्लिनिक में मौजूद कई जानवर आग की वजह से जान गंवा चुके होंगे। उन्होंने बताया कि करीब आधा दर्जन जानवरों के मरने की आशंका है।
हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान के लिए 19 दमकल गाड़ियां, कई दमकल टीमें, एनडीआरएफ, SDRF और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव कार्य दोपहर करीब 3 बजे शुरू किया गया। दमकल विभाग के अधिकारी संतोष कुमार त्रिपाठी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि आग बुझाने और बचाव का अभियान शाम करीब 6 बजे पूरा हो गया। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के शवों को पहचान और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर से पोस्टमॉर्टम हाउस भेजा गया। केजीएमयू के जनसंपर्क अधिकारी के.के. सिंह ने बताया कि मृतकों में अधिकतर युवा थे।