हाथ से उतर गई चमड़ी...लखनऊ में आग लगी तो दूसरी मंजिल से कूदने वाले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर को किया बयान

लखनऊ के आशियाना इलाके में रहने वाले 32 वर्षीय मोहम्मद आसिफ अलीगंज स्थित एक इमारत की दूसरी मंजिल पर बने गेमिंग स्टूडियो में काम करते थे। आग लगने की घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कुछ ही पलों में खुशी का माहौल एक बड़े हादसे में बदल गया

अपडेटेड Jun 23, 2026 पर 4:24 PM
लखनऊ में अलीगंज स्थित एक इमारत में आग लगने से 15 छात्रों की मौत हुई है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार 22 जून को एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ है, जिसने पूरे सूबे को झकझोर कर रख दिया है। लखनऊ में अलीगंज स्थित एक इमारत में आग लगने से 15 छात्रों की मौत हुई है। इस दर्दनाक हादसे में कई लोग घायल भी हैं। अधिकारियों के अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप थी, जबकि ऊपरी मंजिल पर गेमिंग जोन संचालित था। वहीं इस भयावह हादसे में बचने वाले मोहम्मद आसिफ ने उस खतरनाक मंजर के बारे में आंखों देखा हाल बताया।

लखनऊ के आशियाना इलाके में रहने वाले 32 वर्षीय मोहम्मद आसिफ अलीगंज स्थित एक इमारत की दूसरी मंजिल पर बने गेमिंग स्टूडियो में काम करते थे। आग लगने की घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कुछ ही पलों में खुशी का माहौल एक बड़े हादसे में बदल गया।

'हाथ से चिपके पिघले तार'


आसिफ ने कहा, "हम सभी सामान्य तरीके से बैठे हुए थे और बातचीत कर रहे थे। तभी अचानक आग लग गई। देखते ही देखते पूरा परिसर धुएं से भर गया। धुआं इतना ज्यादा था कि सामने कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।" उन्होंने बताया कि इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर एक पालतू जानवरों का सामान बेचने वाली दुकान थी, जहां काफी मात्रा में सामान रखा हुआ था। संभव है कि इसी वजह से आग तेजी से फैल गई हो। जान बचाने के लिए आसिफ को दूसरी मंजिल से नीचे कूदना पड़ा। उन्होंने बताया, "मैं हाई-टेंशन तार के सहारे नीचे उतरा। आग की गर्मी इतनी ज्यादा थी कि तार तक पिघल गया और मेरे हाथ बुरी तरह झुलस गए। अगर मैं 10-15 सेकंड और देर करता, तो शायद मेरी भी जान चली जाती।"

'हमें काफी देर में मिली मदद'

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद इलाज मिलने में देरी हुई। आसिफ के मुताबिक, "हम काफी देर तक अस्पताल में बैठे रहे, लेकिन किसी ने हमारी तरफ ध्यान नहीं दिया।" आसिफ ने बताया कि उनके एक साथी ने भी जान बचाने के लिए ऊपर से छलांग लगाई थी, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। वह काफी देर तक सड़क पर पड़ा रहा, लेकिन समय पर मदद नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि इमारत में सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह नाकाम साबित हुई। छत पर जाने का दरवाजा बंद था, आग बुझाने वाले स्प्रिंकलर काम नहीं कर रहे थे और बायोमेट्रिक दरवाजे लॉक थे। इसी कारण कई लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके।

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