Lucknow Fire Mishap: आग से तबाह हुई बिल्डिंग को 2016 में गिराने का मिला था आदेश, फिर 'भ्रष्ट' अधिकारियों ने कर दिया रद्द, लखनऊ अग्निकांड में बड़ा खुलासा

Lucknow Fire Mishap: यूपी सरकार ने एक बयान में कहा है कि लखनऊ के जिस तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई, उसे 2016 में अवैध निर्माण के कारण गिराने का आदेश दिया गया था। लेकिन दो महीने से भी कम समय में उस आदेश को रद्द कर दिया गया

अपडेटेड Jun 23, 2026 पर 11:36 AM
Lucknow Fire Mishap: आग हादसे की शिकार बिल्डिंग को 2016 में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था

Lucknow Fire Misha Update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार (22 जून) को आग हादसे की शिकार हुई तीन मंजिला बिल्डिंग को 2016 में गिराने का आदेश दिया गया था। लेकिन दो माह से भी कम वक्त में ही उस आदेश को निरस्त कर दिया गया था। राज्य सरकार की ओर से देर रात जारी एक बयान के मुताबिक बिल्डिंग से जुड़े पुराने दस्तावेज और लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में हैं।

बयान के अनुसार सोमवार को जिस इमारत में आग लगने की घटना हुई उसके खिलाफ 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। लेकिन दो महीने से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया था। सोमवार को कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई।

बयान के मुताबिक अलीगंज के सेक्टर-D स्थित इस इमारत को 11 जुलाई 1980 को लॉटरी सिस्टम के तहत विजय कुमार को हायर-परचेज स्कीम पर आवंटित किया गया था। उसी साल चार नवंबर को इमारत का कब्जा सौंप दिया गया था।


अधिकारियों की लापरवाही

अधिकारियों के अनुसार साल 2005 में यह बिल्डिंग प्रॉपर्टी सेल डीड के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज की गई। इसे 19 जनवरी 2013 को कपल ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया।

दर्ज हुआ था FIR

उन्होंने बताया कि करीब 1992 वर्गफुट क्षेत्रफल वाली इस बिल्डिंग का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को सेल्फ-सर्टिफिकेशन बिल्डिंग प्लान स्कीम के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। हालांकि बाद में इमारत में अनाधिकृत निर्माण की बात सामने आने पर लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया।

बयान के अनुसार जांच के बाद 10 मई 2016 को अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया। लेकिन दो महीने के अंदर पांच जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।इसी इमारत में सोमवार को लगी भीषण आग में झुलसकर कम से कम 15 लोगों की मौत हो गयी तथा नौ अन्य जख्मी हो गये।

मामले में 4 अरेस्ट

पुलिस ने इस मामले में इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल आग की जद में आई बिल्डिंग के संयुक्त रूप से मालिक थे।

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आग लगने के बाद ज्यादातर पीड़ित उत्तरी लखनऊ के अलीगंज में उषा मेहता मार्ग पर बनी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर फंसे हुए थे। यहां छात्र एक एनिमेशन सेंटर में क्लास ले रहे थे। आग लगने की वजह का अभी पता नहीं चल पाया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई लोग इमारत से कूद गए, जो आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गई। इस बिल्डिंग में एक पेट क्लिनिक भी था। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे लगी आग पर काबू पाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफ़ॉर्म गाड़ी समेत 14 दमकल गाड़ियां तैनात की गईं।

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