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Lucknow fire update: 'हाथ से उतर गई चमड़ी...'; लखनऊ में आग लगी तो दूसरी मंजिल से कूदने वाले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर को किया बयान

Lucknow fire tragedy update: 22 जून को लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक कोचिंग सेंटर में आग लग गई। आग फैलने पर कई छात्र और स्टाफ सदस्य बिल्डिंग के अंदर फंस गए थे। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई। जबकि 9 लोग घायल बताए जा रहे हैं

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jun 23, 2026 पर 4:28 PM
Lucknow fire update: 'हाथ से उतर गई चमड़ी...'; लखनऊ में आग लगी तो दूसरी मंजिल से कूदने वाले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर को किया बयान
Lucknow fire tragedy update: अलीगंज की बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर बने गेमिंग स्टूडियो में 32 साल के मोहम्मद आसिफ काम करते थे

Lucknow fire tragedy update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार 22 जून को एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने सिर्फ 15 लोगों की जान ही नहीं ली। बल्कि उनके साथ जुड़े अनगिनत सपनों, उम्मीदों को भी हमेशा के लिए राख कर दिया। कोई अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, तो कोई बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देख रहा था। कोई अपने करियर की शुरुआत कर रहा था, तो कोई छुट्टियां बिताने की तैयारी में जुटा था। लेकिन इस भीषण अग्निकांड ने उनके जीवन के साथ-साथ उनके सपनों को भी निगल लिया।

लखनऊ के आशियाना निवासी 32 वर्षीय मोहम्मद आसिफ उस भयावह अग्निकांड के चश्मदीद और पीड़ित हैं, जो अलीगंज स्थित बिल्डिंग में हुआ। आसिफ दूसरी मंजिल पर मौजूद गेमिंग स्टूडियो में काम करते थे। उन्होंने News18 को बताया बताया कि हादसे के वक्त सब कुछ सामान्य था। लेकिन कुछ ही पलों में माहौल मौत के मंजर में बदल गया। आसिफ के बताया, "हम लोग बैठे हुए थे और मस्ती कर रहे थे। अचानक सब कुछ एक दर्दनाक हादसे में बदल गया। धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।"

उन्होंने आशंका जताई कि बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में मौजूद पेट स्टोर में बड़ी मात्रा में रखा सामान आग को तेजी से फैलाने का कारण बना। जान बचाने के लिए आसिफ को दूसरी मंजिल से छलांग लगानी पड़ी। उन्होंने बताया, "मैं हाईटेंशन वायर के सहारे नीचे कूदा। गर्मी इतनी ज्यादा थी कि तार भी पिघल चुका था। उसे पकड़ने के दौरान मेरे हाथों की चमड़ी तक उधड़ गई। अगर मैं 10-15 सेकंड और देर करता तो शायद मेरी भी मौत हो जाती।"

आसिफ ने राहत और उचित इलाज व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी काफी देर तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने बताया कि उनके एक दोस्त ने भी जान बचाने के लिए छलांग लगाई थी। लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। आसिफ ने कहा, "वह काफी देर तक सड़क पर ही पड़ा रहा, मदद समय पर नहीं पहुंची।"

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