महाराष्ट्र की राजनीति अक्सर चौंकाने वाले नतीजे देती है और इस बार ठाणे नगर निगम चुनावों में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। म्हात्रे परिवार ने एक अनोखी जीत दर्ज की, जहां परिवार के तीन सदस्यों ने तीन अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर चुनाव लड़ा और तीनों अपने-अपने वार्ड से जीत गए। यह नतीजा महाराष्ट्र में परिवार की राजनीति की गहरी पकड़ को दिखाता है, जो लगभग हर चुनाव में किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाती है।
एक परिवार के तीन लोगों ने दर्ज की जीत
इन चुनावों में प्रह्लाद म्हात्रे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण (एमएनएस) के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। वहीं रेखा म्हात्रे ने शिवसेना के टिकट पर चुनाव जीत लिया। परिवार के एक और सदस्य रवीण म्हात्रे ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए एक वार्ड अपने नाम किया। हालांकि परिवार के लिए व्यक्तिगत जीत के बावजूद, कुल नतीजे प्रह्लाद म्हात्रे के लिए खास खुश करने वाले नहीं रहे। वजह यह रही कि ठाणे नगर निगम चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने ज़्यादातर सीटों पर कब्जा जमाते हुए साफ बढ़त बना ली।
कोल्हे परिवार का भी बड़ा कारनामा
म्हात्रे परिवार ही नहीं, बल्कि एक और परिवार ने भी जलगांव नगर निगम (JMC) चुनावों में खास पहचान बनाई। यहां कोल्हे परिवार के तीन सदस्यों ने एक साथ जीत दर्ज की। खास बात यह रही कि तीनों ने शिव सेना के टिकट पर चुनाव लड़ा था। कोल्हे परिवार के ललित कोल्हे, सिंधुताई कोल्हे और पियूष ललित कोल्हे के जीतने के बाद जलगांव में भावुक पल देखने को मिला। इनमें से ललित कोल्हे ने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
इस जीत से जुड़ी एक भावनात्मक कहानी भी सामने आई। परिवार ने यह संकल्प लिया था कि जब तक ललित कोल्हे जेल से रिहा नहीं हो जाते, तब तक वे चप्पल नहीं पहनेंगे। ललित की पत्नी सरीता कोल्हे ने कहा, “मेरे बेटे, पति और सास—तीनों चुनाव जीत गए हैं। आप देख सकते हैं कि हम में से किसी ने भी चप्पल नहीं पहनी है। ललित की गिरफ्तारी के बाद से हमने चप्पल नहीं पहनी। मैंने कहा था कि जब वे वापस आएंगे, तभी चप्पल पहनूंगी, लेकिन जनता ने हमारे लिए सब कुछ मुमकिन कर दिया।” यह जीत न सिर्फ राजनीतिक थी, बल्कि परिवार के लिए एक गहरा भावनात्मक पल भी बन गई।
ठाणे में कमाल का प्रदर्शन
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह क्षेत्र और शिवसेना का मजबूत गढ़ माने जाने वाला ठाणे, इस बार अलग ही सियासी तस्वीर लेकर सामने आया। यहां बीजेपी और शिंदे गुट की शिव सेना ने मिलकर चुनाव लड़ा। वहीं महायुति के एक और साथी अजीत पवार की एनसीपी ने अकेले मैदान में उतरने का फैसला किया। 131 सीटों वाली ठाणे नगर निगम में शिंदे सेना ने 87 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जबकि बीजेपी ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा।
नहीं चला ठाकरे बर्दर्स का जादू
दूसरी तरफ, करीब 20 साल बाद ठाकरे परिवार के चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक बार फिर साथ आए। दोनों ने महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में मिलकर लड़ने का फैसला किया और ठाणे में भी अपना गठबंधन बनाए रखा। इसके साथ ही उन्होंने शरद पवार की एनसीपी के साथ भी हाथ मिलाया। हालांकि, ठाकरे बंधुओं और शरद पवार के इस गठबंधन को बीजेपी–शिवसेना की मजबूत लहर के आगे खास सफलता नहीं मिल पाई। वहीं कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ते हुए 96 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे।