महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के कोलगांव गांव में महिलाओं के सम्मान को लेकर एक अनोखा फैसला लिया गया है। यहां ग्राम पंचायत ने तय किया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी की मां या बहन को लेकर गाली देता हुआ पाया गया, तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यह प्रस्ताव रविवार को ग्राम सभा की बैठक में पास किया गया। यह बैठक श्रीगोंदा क्षेत्र के कोलगांव में आयोजित की गई थी।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, गांव में International Women's Day के मौके पर महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए एक कार्यक्रम रखा गया था।
इसी दौरान कृषि परिवार से जुड़ी और सेल्फ हेल्प ग्रुप की सदस्य पूजा जगताप ने यह प्रस्ताव रखा कि गांव में मां-बहन से जुड़ी गालियां देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
इस सुझाव के बाद ग्राम सभा में इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई और आखिर में पंचायत ने इसे लागू करने का फैसला कर लिया।
डिजिटल सबूत पर ही लगेगा जुर्माना
गांव के सरपंच पुरुषोत्तम लगद ने बताया कि नियम का गलत इस्तेमाल न हो, इसलिए जुर्माना तभी लगाया जाएगा जब डिजिटल सबूत (जैसे वीडियो या ऑडियो) पेश किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि क्योंकि यह प्रस्ताव महिलाओं की ओर से आया है, इसलिए पंचायत ने महिलाओं और उनके परिवारों से भी अपील की है कि वे ऐसे मामलों की पहचान करने में आगे आएं।
सरपंच ने यह भी बताया कि जुर्माने से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल गांव के विकास कार्यों में किया जाएगा।
पुजा जगताप ने कहा कि आजकल किसी को अपमानित करने के लिए मां या बहन के नाम से गाली देना बहुत आम हो गया है। उन्होंने कहा कि लड़कियां बड़ी होकर परिवार की जिम्मेदारी उठाती हैं, इसलिए उनकी पहचान का इस तरह अपमान करना सही नहीं है।
ग्राम सभा में सफाई को लेकर भी एक प्रस्ताव पास किया गया। इसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपने घर या दुकान के आसपास गंदगी फैलाता पाया गया, तो उस पर 100 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके लिए भी फोटो के रूप में सबूत देना जरूरी होगा।
बच्चों की पढ़ाई के लिए भी नियम
सरपंच ने बताया कि गांव में पिछले एक साल से एक और नियम लागू है। इसके तहत गांव के बच्चे हर दिन शाम 7 बजे से 9 बजे तक पढ़ाई करते हैं। इस दौरान घर में टीवी और मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया जाता, और इस नियम का पालन माता-पिता भी करते हैं।
करीब 9 हजार आबादी वाले इस गांव में अलग-अलग जाति और धर्म के लोग रहते हैं और ज्यादातर लोग खेती से जुड़े हैं। पंचायत का मानना है कि इन नियमों से गांव में अनुशासन और आपसी सम्मान का माहौल बेहतर होगा।