तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोमवार को अपनी ही पार्टी के सांसद यूसुफ पठान पर निशाना साधा। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पार्टी के भीतर कुछ नेताओं के बगावती तेवर सामने आ रहे हैं। महुआ मोइत्रा ने पहले उन नेताओं की आलोचना की थी, जिन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करने की बात कही है। उन्होंने ऐसे नेताओं को "लालची, स्वार्थी और गद्दार" बताया।
इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए यूसुफ पठान पर भी सवाल उठाए। महुआ ने लिखा, "यूसुफ पठान, क्या आप इसलिए दिल्ली जा रहे हैं क्योंकि अमित शाह ने आपको बुलाया है? थोड़ी हिम्मत दिखाइए। आपने भारत के लिए क्रिकेट खेला है। हमारे जिले के लोगों ने आपको बड़े अंतर से जीत दिलाई थी। अब थोड़ा आत्मसम्मान और जिम्मेदारी भी दिखाइए।"
बागी नेताओं पर साधा निशाना
इससे पहले महुआ मोइत्रा ने एक अलग पोस्ट में पार्टी के बागी नेताओं पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता जनता द्वारा दिए गए जनादेश के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने उन्हें चुनौती दी कि अगर वे बीजेपी या एनडीए का समर्थन करना चाहते हैं, तो पहले अपनी सांसद पद की सीट छोड़ें और फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर जनता का सामना करें। महुआ मोइत्रा ने कहा कि 2024 का लोकसभा चुनाव इन नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार के रूप में जीता था, न कि बीजेपी या एनडीए के प्रतिनिधि के तौर पर।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "सभी सांसद 2024 में टीएमसी के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे हैं। जनता ने उन्हें एनडीए के नाम पर वोट नहीं दिया था। जो लोग अब डर या लालच में आकर बीजेपी का साथ देना चाहते हैं, वे पहले इस्तीफा दें और फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें। तब पता चल जाएगा कि उनकी असली ताकत कितनी है।"
टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा विवाद अब और गहरा होता नजर आ रहा है। वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने अपने रुख की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी दे दी है।
इस घटनाक्रम ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हाल ही में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी पहले से ही दबाव में थी और अब इस नए विवाद ने अंदरूनी तनाव को और बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, बागी सांसद फिलहाल टीएमसी छोड़ना या बीजेपी में शामिल होना नहीं चाहते हैं। वे पार्टी में रहते हुए ही एनडीए का समर्थन करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि इस अलग गुट का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर सकती हैं।
बागी सांसदों का कहना है कि काकोली घोष दस्तीदार अभी भी लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की चीफ व्हिप हैं। उनका दावा है कि उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नियुक्त किए जाने की जानकारी लोकसभा सचिवालय को आधिकारिक तौर पर कभी नहीं दी गई थी। इस पूरे मामले में सांसदों की संख्या काफी अहम मानी जा रही है। फिलहाल लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं। हालांकि, बशीरहाट से सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद एक सीट खाली हो गई है। अगर करीब 20 सांसद बागी गुट के साथ आते हैं, तो उनके पास आवश्यक संख्या बल हो जाएगा। यह संख्या दलबदल विरोधी कानून के तहत मिलने वाली सुरक्षा के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से भी अधिक होगी। ऐसे में बागी गुट की स्थिति काफी मजबूत हो सकती है।