Majnu ka Tila: मजनू का टीला इलाके में बंद होंगी खाने-पीने की दुकानें? दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश से हड़कंप

Majnu ka Tila: दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राष्ट्रीय राजधानी के मजनू का टीला इलाके में बिना अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान और सुरक्षा उपायों के बिना चल रहे कैफे, बार और रेस्तरां के खिलाफ कार्रवाई करें। अदालत ने कहा कि यमुना नदी के किनारे मजनू का टीला इलाके में मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग्स में कई गैर-कानूनी रेस्टोरेंट चल रहे हैं

अपडेटेड Dec 29, 2025 पर 5:41 PM
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Majnu ka Tila: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि अधिकारी मजनू का टीला इलाके में बने अवैध कैफे और रेस्तरां पर कार्रवाई करें

Majnu ka Tila: दिल्ली के उत्तर-पूर्व में स्थित मजनू का टीला शानदार रेस्टोरेंट, कैफे, बेकरी समेत खाने-पीने की दुकानों के लिए एक लोकप्रिय जगह है। लेकिन अब यहां की कुछ खाने-पीने की दुकानें हटाई जा सकती हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय राजधानी के मजनू का टीला इलाके में बिना अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान और सुरक्षा उपायों के चल रहे कैफे, बार और रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई करें। चीफ जस्टिस ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "मोमोज की रेहड़ी को छोड़कर, बाकी सब कुछ हटा दिया जाएगा।"

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यमुना नदी के किनारे मजनू का टीला इलाके में मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग्स में कई गैर-कानूनी रेस्टोरेंट चल रहे हैं। अदालत ने कहा कि इन बिल्डिंग्स का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए किया जा रहा है।

कोर्ट ने आगे कहा कि दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने पहले ही इस मामले में खुद से शिकायत दर्ज की है। अदालत ने कहा, "हम याचिकाकर्ता की शिकायतों की समीक्षा करने के बाद अधिकारियों को कानून के तहत जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा करते हैं।"


कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि DDA द्वारा दायर शिकायत में जो भी फैसले और कार्रवाई जरूरी हैं उन्हें तेजी से लागू किया जाए। अदालत ने कहा कि हो सके तो तीन महीने के अंदर इसे लागू किया जाए। सुनवाई के दौरान, जस्टिस गेडेला ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधे छात्र मजनू का टीला के इन कैफे और रेस्टोरेंट में अक्सर जाते हैं। अदालत ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि समय पर कार्रवाई की जाए।

चीफ जस्टिस ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, "मोमो के स्टॉल को छोड़कर, बाकी सब हटा दिया जाएगा।" कोर्ट अवैध बिल्डिंग्स के खिलाफ अर्नव सिंह और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें बिना अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान के इन्हें संचालित किए जाने का आरोप लगाया गया था।

याचिका में दावा किया गया है कि इन इमारतों की बनावट और कामकाज की स्थिति तुरंत जानलेवा खतरा पैदा करती है। इसमें यह भी कहा गया है कि ज्यादातर इमारतों में सीढ़ियां सिर्फ़ तीसरी या चौथी मंज़ल तक जाती हैं। इससे छोटी और कम क्षमता वाली लिफ्ट ही ऊपर जाने का एकमात्र रास्ता बचती हैं।

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याचिकाकर्ताओं ने गोवा के एक नाइटक्लब में हाल ही में हुई दुखद घटना का भी ज़िक्र किया, जहां 6 दिसंबर को आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह घटना इसी तरह के हालात में क्या हो सकता है, इसकी एक कड़ी चेतावनी है।

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