'डोकलाम और पूर्व आर्मी चीफ की किताब', राहुल गांधी ने जिसका दिया हवाला...जानें क्या कह चुके हैं जनरल नरवणे?

लोकसभा में राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की जिस किताब का जिक्र कर रहे थे उसका नाम ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' है। ये किताब फिलहाल पब्लिश नहीं हुई है। दरअसल राहुल गांधी जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को लेकर हाल ही में छपे एक मीडिया आर्टिकल का जिक्र कर रहे थे

अपडेटेड Feb 02, 2026 पर 4:30 PM
Story continues below Advertisement
सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक बयान पर जमकर हंगामा हुआ।

सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक बयान पर जमकर हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने सदन में डोकलाम का मुद्दा उठाया और पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की देकर सरकार को घेरने की कोशिश की। इस पर सरकार की तरफ से कहा गया है कि जिस किताब के आधार पर राहुल आरोप लगा रहे हैं, वो किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है। राहुल बार-बार सदन में एक ही मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहे थे हालांकि स्पीकर ने ऐसा करने से मना किया और बाद में हंगामे बढ़ते देख सदन को स्थगित कर दिया। वहीं सदन में हंगामे के बीच जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

 सदन में किस किताब पर हंगामा 

बता दें कि लोकसभा में राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की जिस किताब का जिक्र कर रहे थे उसका नाम ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' है। ये किताब फिलहाल पब्लिश नहीं हुई है। दरअसल राहुल गांधी जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को लेकर हाल ही में छपे एक मीडिया आर्टिकल का जिक्र कर रहे थे। इस आर्टिकल में मनोज नरवणे कि किताब के हवाले से दावा किया गया कि 2020 में चीनी सेना भारतीय सेना की पोजीशन के काफी करीब आ गई थी। । हालांकि, उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ मनोज नरवणे की जिस पुस्तक का हवाला दिया, उस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदन में एक पब्लिश्ड मैगजीन की कहानी के कोट्स का हवाला दिया, जो सदन के नियमों के खिलाफ है।


2020 में हुई थी झड़प

बता दें कि जून 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे और कुछ चीनी सैनिकों की भी मौत हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच करीब चार साल तक तनाव बना रहा। अक्टूबर 2024 में हालात सुधरे, जब देपसांग और डेमचोक इलाकों से करीब 95 प्रतिशत सैनिक पीछे हटे और कुछ खास इलाकों में दोबारा गश्त शुरू हो गई। जनरल नरवणे की यादों में साफ तौर पर लिखा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गलवान घाटी में हुई झड़प को कभी नहीं भूलेंगे।

 एम एम नरवणे रखी थी ये बात

गलवान झड़प और LAC से पीछे हटने के मुद्दे पर पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे ने अलग-अलग इंटरव्यू में अपनी बात रखी थी। गलवान की घटना पर ANI को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि इस झड़प से न सिर्फ चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की छवि को नुकसान पहुंचा, बल्कि एक देश के तौर पर चीन की साख भी घटी। नरवणे के मुताबिक, इस घटना के बाद भारत ने दुनिया को यह दिखा दिया कि चीन का सामना किया जा सकता है, जो आमतौर पर अपने छोटे पड़ोसियों को डराने की कोशिश करता है।

चीन को लगा था झटका 

उन्होंने कहा, “कनाडा से लेकर लिथुआनिया, यूरोप से लेकर फिलीपींस तक, सभी को यह समझ में आ गया कि अगर आप सही के लिए खड़े हैं और अपने सिद्धांतों पर टिके रहते हैं, तो चीन का सामना किया जा सकता है। झुकने की जरूरत नहीं है। भारत ने एक देश के रूप में दुनिया को दिखा दिया कि पड़ोस के गुंडों का भी डटकर सामना किया जा सकता है।” वहीं लल्लनटॉप के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि 1979 के बाद यह पहली बार था जब चीन को नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि चीन अब तक अपने आसपास के छोटे देशों को धमकाता रहा है, लेकिन यह पहली बार था जब उसे करारा झटका लगा और उसे समझ आया कि उसकी यह रणनीति अब आगे काम नहीं करने वाली है।

उन्होंने एक अन्य इंटरव्यू में कहा था कि भारत ने कोई भी इलाका नहीं खोया है और हालात पहले जैसे ही हैं। उनके मुताबिक, यह समझौता आपसी और बराबर सुरक्षा के सिद्धांत पर हुआ है। उन्होंने कहा कि डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया को दोनों देशों के हित में देखा जाना चाहिए, ताकि LAC पर स्थिरता बनी रहे और किसी भी तरह के टकराव की आशंका कम हो। उन्होंने साफ कहा कि भारत ने एक इंच भी जमीन नहीं गंवाई है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।