Ghaziabad: वीडियो के लिए 10 हजार तो फोटो के लिए 4000, पाकिस्तान के लिए जासूसी नेटवर्क का सरगना गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, यह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा अब तक का बड़ा जासूसी मॉड्यूल है। इसमें मेरठ का रहने वाला सोहेल मलिक, जो इस गिरोह का मुख्य सरगना है और महक उर्फ सने इरम नाम की महिला भी शामिल हैं। ये दोनों लोगों की भर्ती करने और उन्हें पैसे दिलाने का काम संभालते थे

अपडेटेड Mar 23, 2026 पर 7:41 PM
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गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े एक जासूसी मॉड्यूल मामले में 8 और लोगों को गिरफ्तार किया है।

गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े एक जासूसी मॉड्यूल मामले में 8 और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही अब कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। पुलिस के मुताबिक, इनमें इस नेटवर्क के मुख्य लोग और सरगना भी शामिल हैं। हाल ही में पकड़े गए आरोपियों में नौशाद अली उर्फ लालू, मीरा और एक नाबालिग शामिल हैं। नौशाद को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया, जहां वह पिछले तीन महीनों से नचौली गांव में पेट्रोल पंप के पास पंक्चर की दुकान चला रहा था। पुलिस ने बताया कि वह बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और इस जासूसी नेटवर्क का एक बड़ा आरोपी है।

ऐसे युवओं को करते थे भर्ती 

जांच में सामने आया है कि नौशाद तकनीकी काम (जैसे मोबाइल रिपेयर, कंप्यूटर और CCTV ऑपरेशन करने वालों) जानने वाले युवाओं को इस नेटवर्क में जोड़ने में अहम भूमिका निभाता था। उसे कोलकाता से वापस लाया गया था और मुमताज तथा पेट्रोल पंप के पूर्व मैनेजर रविंद्र के जरिए वहां काम दिलाया गया था। यह कार्रवाई 14 मार्च को हुई पिछली गिरफ्तारी का ही हिस्सा है, जब गाजियाबाद पुलिस ने छह लोगों को पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक, यह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा अब तक का बड़ा जासूसी मॉड्यूल है। इसमें मेरठ का रहने वाला सोहेल मलिक, जो इस गिरोह का मुख्य सरगना है और महक उर्फ सने इरम नाम की महिला भी शामिल हैं। ये दोनों लोगों की भर्ती करने और उन्हें पैसे दिलाने का काम संभालते थे।


हर फोटो के लिए मिलते थे इतने पैसे 

पुलिस के अनुसार, इस जासूसी नेटवर्क ने खासकर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को पैसे का लालच देकर अपने जाल में फंसाया। ऐसे लोगों को सोशल मीडिया के जरिए ढूंढा जाता था, जिनके पास तकनीकी जानकारी हो या जिनकी प्रवृत्ति संदिग्ध हो, लेकिन उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। शक से बचने के लिए इस गिरोह में महिलाओं को भी शामिल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी रेलवे स्टेशन और सुरक्षा बलों के ठिकानों जैसी संवेदनशील जगहों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर WhatsApp ग्रुप के जरिए पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स को भेजते थे। इसके बदले उन्हें हर फोटो के लिए 4,000 से 6,000 रुपये मिलते थे, जबकि सोहेल मलिक जैसे बड़े गुर्गों को एक वीडियो क्लिप के लिए 10,000 रुपये तक दिए जाते थे।

कई अहम जगह लगे थे कैमरे

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत रेलवे स्टेशन जैसे अहम स्थानों पर छिपकर CCTV कैमरे लगा रहा था। इसका मकसद सेना के रास्तों, सैनिकों की आवाजाही और हथियारों की गतिविधियों की लाइव फुटेज पाकिस्तान भेजना था। जांच में सामने आया कि इन कैमरों को दिल्ली और सोनीपत से सीधे पाकिस्तान में बैठकर भी देखा जा सकता था, जिससे वहां के लोग हर पल की जानकारी हासिल कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क की योजना दिल्ली से लेकर कश्मीर तक करीब 50 ऐसे कैमरे लगाने की थी, ताकि संवेदनशील सैन्य जानकारी जुटाई जा सके। पुलिस ने इन जगहों से कैमरे बरामद कर लिए हैं और उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। साथ ही आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक स्थानीय बीट कांस्टेबल को कुछ संदिग्ध गतिविधियां नजर आईं। इसके बाद गहराई से जांच की गई, जिसमें ISI से जुड़े इस जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ

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