India Defense Sector: भारत में हथियार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने की ओर एक अहम कदम बढ़ाते हुए सरकार ने 25 अगस्त को एक बड़ा ऐलान किया है। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल टेक्नोलॉजी को देश के भीतर ही उत्पादन के लिए घरेलू उद्योग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य भारतीय कंपनियों की रक्षा क्षेत्र में भागीदारी को बढ़ावा देना और देश के भीतर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर
हथियारों के इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय ने इस फैसले का आधिकारिक ऐलान किया। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी शेयर करते हुए कहा कि रक्षा में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय उद्योगों को देश के भीतर उत्पादन के लिए DRDO विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीकों के हस्तांतरण (ToT) को मंजूरी दे दी है।
मंत्रालय का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) भारतीय उद्योगों को जरूरी क्वॉलिफिकेशन, सर्टिफिकेशन और रेग्युलेटरी जरूरतों के मुताबिक स्वदेशी उत्पादन करने में सक्षम बनाएगा। इससे भारतीय डिफेंस इकोसिस्टम में घरेलू कंपनियों की भागीदारी को एक बड़ा बूस्ट मिलेगा।
एमएसएमई और टेक पार्टनर्स के लिए खुलेंगे नए रास्ते
इस बड़े फैसले से भारत रूस सहित अन्य देशों से होने वाले हथियारों के आयात पर अपनी निर्भरता घटाना चाहता है और देश के भीतर एक मजबूत डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री खड़ा करना चाहता है। मंत्रालय का कहना है कि सरकार डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की क्षमताओं को बढ़ाने, रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने और सप्लाई चेन में एमएसएमई (MSMEs) और दूसरे टेक पार्टनर्स की भागीदारी को सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है।
इस नए प्रावधान से मिसाइल प्रणाली के विकास का औद्योगिक उत्पादन किया जाना अब संभव हो पाएगा। यह हाई एंड डिफेंस सिस्टम के डेवलपमेंट और इन्हें बनाने के लिए भारतीय उद्योग की क्षमताओं का लाभ उठाने की एक बड़ी कवायद है। DRDO इस दिशा में लगातार कोशिशें कर रहा है और ये बड़ा डेवलपमेंट इसी का नतीजा है।
प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और स्पेयर पार्ट्स में स्वदेशीकरण
इससे पहले की रिपोर्टों में यह बात सामने आई थी कि DRDO ने भविष्य के डेवलपमेंट और प्रोडक्शन से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सेदारी के लिए प्राइवेट कंपनियों को आमंत्रित कर रहा है। इसके अलावा न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायु सेना ने पिछले पांच वर्षों में अपने द्वारा अक्सर इस्तेमाल किए जाने वाले 97 प्रतिशत ऑपरेशनल फाइटर स्पेयर पार्ट्स का स्वदेशीकरण कर लिया है।
पिछले हफ्ते ही रक्षा मंत्रालय ने 405 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं को कवर करने वाली एक स्वदेशीकरण सूची जारी की थी। इन डिफेंस आइटम को टोटैलिटी में देखें तो करीब 3000 करोड़ रुपये का बिजनेस पोटेंशियल भी इसमें शामिल है।