Monsoon Deficit Alert: मानसून की विदाई शुरू! 14 राज्यों में सूखा जैसी स्थिति, इस साल 10% कम बारिश का अनुमान

Monsoon 2026 farewell: मानसून 2026 की विदाई के साथ इस साल के बारिश के आंकड़े अब अंतिम चरण में पहुंच रहे हैं। 19 सितंबर तक देश में 15% बारिश की कमी और 14 राज्यों में 20% से ज्यादा घाटा दर्ज होना चिंता का विषय है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणाली से पूर्वी और तटीय इलाकों में बारिश मिल सकती है

अपडेटेड Sep 20, 2026 पर 2:55 PM
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Monsoon 2026 farewell: 19 सितंबर तक भारत में 15% बारिश की कमी और 14 राज्यों में 20% से ज्यादा घाटा दर्ज होना चिंता का विषय है

Monsoon 2026 farewell: देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की विदाई शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार मानसून सीजन सामान्य से करीब 10% कम बारिश के साथ खत्म होने की आशंका जताई जा रही है। 19 सितंबर तक देशभर में संचयी बारिश (तय अवधि में हुई कुल बारिश) सामान्य से 15% कम दर्ज की गई है। खास बात यह है कि अब तक 14 राज्यों में बारिश की कमी 20% से ज्यादा रही है। इनमें बिहार, पंजाब, हरियाणा के अलावा दक्षिण भारत के सभी पांच प्रायद्वीपीय राज्य शामिल हैं। राजस्थान के कुछ और हिस्सों से अगले तीन से चार दिन में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना है।

'टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के अनुसार भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो गई। मानसून की वापसी की सामान्य तारीख 17 सितंबर मानी जाती है। यानी इस साल मानसून की विदाई सामान्य समय से करीब दो दिन बाद शुरू हुई है। अब सितंबर के बाकी दिनों की बारिश यह तय करने में अहम होगी कि मानसून सीजन का अंतिम बारिश घाटा कितना रहता है। इसका खरीफ उत्पादन तथा आने वाले रबी सीजन पर कितना असर पड़ता है।

पश्चिमी राजस्थान से शुरू हुई मानसून की विदाई


IMD के अनुसार, 19 सितंबर तक मानसून की वापसी की रेखा पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से गुजर रही थी। इससे संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में मानसून देश के अन्य हिस्सों से भी धीरे-धीरे पीछे हटेगा। हालांकि, 20 और 21 सितंबर को कोटा और उदयपुर संभागों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियां राजस्थान के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ पंजाब और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों से मानसून की आगे की वापसी के लिए अनुकूल हैं। अगले 3-4 दिनों में मानसून की वापसी और इलाकों से होने की संभावना है। सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी 17 सितंबर के आसपास शुरू होकर 15 अक्टूबर तक पूरी होती है। इसके बाद देश में सर्दियों के मानसून का प्रभाव बढ़ना शुरू होता है।

19 सितंबर तक 15% बारिश की कमी

इस साल 1 जून से 19 सितंबर तक देश में कुल बारिश सामान्य से 15% कम रही है। TOI में प्रकाशित IMD के आंकड़ों के मुताबिक, मानसून सीजन के अंत तक देश में बारिश की कमी 10% से ज्यादा रह सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह सामान्य मानसून की तुलना में स्पष्ट कमी वाला सीजन होगा।

मानसून की विदाई शुरू होने के साथ ही अब इस बात पर नजर रहेगी कि सितंबर के बाकी दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में कितनी बारिश होती है। कुछ क्षेत्रों में अभी भी बारिश की भरपाई की गुंजाइश है। लेकिन क्षेत्रीय असमानता बड़ी चुनौती बनी हुई है।

14 राज्यों में 20% से ज्यादा बारिश हुई कम

19 सितंबर तक 14 राज्यों में सामान्य से 20% से ज्यादा बारिश की कमी दर्ज की गई है। इनमें:-

बिहार

पंजाब

हरियाणा

दक्षिण भारत के पांचों प्रायद्वीपीय राज्य

इसके अलावा कुछ उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर राज्य शामिल हैं। अखबार में दिए गए नक्शे के अनुसार कई राज्यों में बारिश की कमी 20% से काफी ज्यादा रही है। वहीं, देश के बड़े हिस्से में बारिश सामान्य दायरे में रही है।

खरीफ फसलों पर क्या पड़ेगा असर?

मानसून की बारिश का सीधा कनेक्शन खरीफ फसलों से है। इस साल बारिश में कमी के बावजूद खरीफ फसलों की बुआई का कुल क्षेत्र बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है। अखबार में दिए आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ फसलों का कुल बोया गया क्षेत्र पिछले साल की तुलना में सिर्फ 1% से थोड़ा अधिक कम हुआ है।

हालांकि, पानी की ज्यादा जरूरत वाली फसल धान की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। धान देश की सबसे ज्यादा क्षेत्रफल में बोई जाने वाली प्रमुख खरीफ फसल है। इसकी बुआई के क्षेत्र में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 4% की कमी दर्ज की गई है।

फसलों को कितना होगा नुकसान?

रिपोर्ट में कृषि विशेषज्ञों के हवाले से यह बात सामने आती है कि भले ही खरीफ की बुआई का कुल क्षेत्र बहुत ज्यादा नहीं घटा है। लेकिन बारिश की क्षेत्रीय असमानता और समय पर बारिश नहीं होने का असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।

यानी सिर्फ कुल बारिश के आंकड़े से कृषि क्षेत्र की पूरी तस्वीर नहीं मिलती। किसी इलाके में बारिश सामान्य से कम हो और दूसरे इलाके में ज्यादा तो राष्ट्रीय औसत कुछ हद तक संतुलित दिखाई दे सकता है। लेकिन स्थानीय स्तर पर किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

इसी तरह बारिश का सही समय पर होना भी महत्वपूर्ण है। बुआई, फसल की शुरुआती बढ़त और पकने के दौरान बारिश की जरूरत अलग-अलग होती है। इसलिए बारिश की कमी का असर आने वाले रबी सीजन की बुआई पर भी पड़ सकता है।

'अल नीनो' ने बढ़ाई टेंशन

रिपोर्ट में अल नीनो (El Nino) का भी जिक्र किया गया है। 'अल नीनो' एक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के समुद्री सतह के तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाते हैं। इसका संबंध आम तौर पर भारत में कमजोर मानसून से जोड़ा जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो की स्थिति भारत में गर्म गर्मी और कमजोर मानसून से जुड़ी रही है। हालांकि, मौजूदा बारिश की स्थिति को केवल अल नीनो के आधार पर नहीं देखा जा सकता। मानसून पर कई अन्य मौसमी और समुद्री परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।

बंगाल की खाड़ी में बन रही वेदर सिस्टम पर नजर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कम दबाव का क्षेत्र और उसके बाद बनने वाला डिप्रेशन मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर विकसित हो सकता है। इससे पूर्वी भारत और खासकर तटीय ओडिशा में अगले सप्ताह अच्छी बारिश होने की संभावना बन सकती है। ऐसे मौसम सिस्टम सितंबर के बचे हुए दिनों में कुछ इलाकों में बारिश की कमी को कम करने में मदद कर सकते हैं।

रबी फसल के लिए भी अहम है बारिश

मानसून की बारिश सिर्फ खरीफ फसलों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। मानसून के बाद मिट्टी में मौजूद नमी और जलाशयों में पानी की स्थिति का असर रबी फसलों पर भी पड़ता है। अगर बारिश नहीं होगी और कई क्षेत्रों में मिट्टी की नमी पर्याप्त नहीं रहती, तो आने वाले रबी सीजन में सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में इसका असर अधिक हो सकता है जहां खेती मानसूनी बारिश पर ज्यादा निर्भर है।

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इस बार मानसून का अब तक का हिसाब

  • 1 जून से 19 सितंबर तक देश में बारिश की कमी: 15%
  • 20% से ज्यादा बारिश की कमी वाले राज्य: 14
  • मानसून की विदाई शुरू होने की तारीख: 19 सितंबर
  • मानसून वापसी की सामान्य शुरुआत: 17 सितंबर
  • वापसी की शुरुआती वाले राज्य: पश्चिमी राजस्थान
  • मानसून वापसी की सामान्य आखिरी तारीख: 15 अक्टूबर
  • खरीफ फसल क्षेत्र: पिछले साल से 1% से थोड़ा अधिक कम
  • धान का बोया क्षेत्र: पिछले साल की तुलना में करीब 4% कम
  • सीजन के अंत तक संभावित बारिश की कमी: 10% से ज्यादा

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