'जिंदगी मैराथन है, कोई 100 मीटर की दौड़ नहीं...', एन चंद्रशेखरन की वो 4 बातें जो हर स्टूडेंट को जाननी चाहिए

N Chandrasekaran: क्या आप भी करियर और एआई के दौर में नौकरी खोने के डर से तनाव में हैं? टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने युवाओं को जीवन में सफल होने के लिए 'मैराथन रेस' का गुरुमंत्र दिया है। जानिए कैसे उतार-चढ़ाव से निपटें और प्रेशर का आनंद लें

अपडेटेड Sep 20, 2026 पर 3:11 PM
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केवल जीतना मायने नहीं रखता, बल्कि तैयारी में पूरी ताकत झोंकना सबसे ज्यादा जरूरी है

N Chandrasekaran: 'जिंदगी एक मैराथन दौड़ है, कोई 100 मीटर की स्प्रिंट नहीं। असली मकसद दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि खुद को हर दिन बेहतर बनाना है।' यह प्रेरणादायक बात देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चेन्नई के चेंगलपट्टू स्थित साई यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित करते हुए कही।

खुद 18 सालों से रनिंग का शौक रखने वाले चंद्रशेखरन ने खेल और जीवन के अनुभवों को जोड़ते हुए युवाओं को सफलता, AI के असर और जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए बेहद खास मंत्र दिए। आइए आपको बताते हैं उनकी इस स्पीच के 4 सबसे बड़े टेकअवे और सबक।

'उतार-चढ़ाव से मत डरो, आत्मविश्वास को अहंकार न बनने दो'


चंद्रशेखरन ने छात्रों को समझाते हुए कहा कि जिंदगी और खेल दोनों का नियम एक जैसा है। इसमें केवल जीतना मायने नहीं रखता, बल्कि तैयारी में पूरी ताकत झोंकना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, 'जीवन में उतार और चढ़ाव दोनों आएंगे। बुरे दौर से कभी मत डरो, और जब अच्छा दौर आए तो अपने आत्मविश्वास को कभी अहंकार में मत बदलने दो। इस पूरी यात्रा का आनंद लो।'

AI से नौकरियां जाने का डर? नए मौकों पर रखें नजर

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और छंटनी की खबरों से डरे हुए युवाओं को उन्होंने ढांढस बंधाया। इस बाबत उन्होंने नकारात्मक खबरों से न घबराने की सलाह दी। एआई की वजह से नौकरियां खत्म होने की खबरें डरा सकती हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी हर दिन नई संभावनाएं पैदा कर रही है।

आने वाले 5 वर्षों में ऐसे नए सेक्टर्स और उद्योग सामने आएंगे, जिनके नाम और शब्दावली का अंदाजा भी आज हमें नहीं है। भारत इस समय बेहद मजबूत आर्थिक स्थिति में है और देश की ग्रोथ पूरी दुनिया के लिए मिसाल बनने वाली है।

'दबाव झेलना एक विशेषाधिकार है'

कॉलेज खत्म करने के बाद करियर में मिलने वाले तनाव और प्रेशर पर बात करते हुए उन्होंने मशहूर टेनिस खिलाड़ी बिली जीन किंग की बात का जिक्र किया। 'प्रेशर महसूस करने का अधिकार मिलना अपने आप में एक विशेषाधिकार है। पढ़ाई के बाद व्यावहारिक जीवन में दबाव आपकी जिंदगी का हिस्सा रहेगा, युवाओं को इस दबाव से डरने के बजाय इसका आनंद लेना सीखना चाहिए।'

सोशल मीडिया के दौर में युवाओं को 2 सलाह

लगातार सीखते रहें: कभी भी सीखना बंद न करें।

कंटेंट का सही चुनाव करें: सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करें। आप क्या पढ़ते हैं, क्या देखते हैं और क्या सुनते हैं इसका चुनाव बहुत सोच-समझकर करें।

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