Monsoon-El Nino Effect: मानसून का सबसे डरावना चेहरा! 70% बढ़ा सूखे का खतरा? मंडराया भुखमरी का संकट, कांपे किसान
Monsoon-El Nino Effect: मौसम विभाग ने अपने अनुमान में भारी कटौती करते हुए कुल मौसमी बारिश केवल 85% होने का अनुमान जताया है। IMD ने 70% सूखे की आशंका जाहिर की है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, सितंबर तक मानसून में किसी बड़े सुधार की उम्मीद नहीं है
Monsoon-El Nino Effect: मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो सप्ताह में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है
Monsoon-El Nino Effect: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय कमजोर दौर से गुजर रहा है। आने वाले दिनों में बारिश की कमी और बढ़ सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले दो सप्ताह में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है। जबकि सितंबर तक मानसून में किसी बड़े सुधार की उम्मीद नहीं है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट (Skymet) ने अपने अनुमान में भारी कटौती करते हुए कुल मौसमी बारिश केवल 85% होने का अनुमान जताया है। वेदर एजेंसी ने 70% सूखे की आशंका जाहिर की है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी चिंता का कारण बन रही है। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित IMD के आकलन के अनुसार, अब तक देश में 548.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। जबकि इस अवधि में औसत बारिश 635.4 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस तरह बारिश में करीब 14 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।
अगले दो सप्ताह भी कमजोर रह सकता है मानसून
IMD के अनुसार, मानसून की स्थिति आने वाले कुछ समय में भी कमजोर बनी रह सकती है। अगले दो सप्ताह के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है।मौसम विभाग का आकलन है कि बारिश की कमी का असर आने वाले समय में और स्पष्ट हो सकता है। खासतौर पर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है।
मानसून की कमी से बढ़ी चिंता
कम बारिश का असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ सकता है। देश के कई हिस्सों में कृषि गतिविधियां मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं। ऐसे में लगातार बारिश की कमी रहने से किसानों की चिंता बढ़ सकती है। IMD के अनुसार, मानसून की कमजोर स्थिति का असर केवल बारिश के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मिट्टी की नमी, जलाशयों और कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
हिमालयी क्षेत्र में भी कमजोर बारिश
मौसम विभाग के आकलन में हिमालयी क्षेत्र में भी मानसूनी गतिविधियों के कमजोर रहने की संभावना जताई गई है। वहीं, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में भी बारिश का वितरण सामान्य नहीं रहने की स्थिति बनी हुई है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून की कमी का असर खासतौर पर उन इलाकों में अधिक महसूस किया जा रहा है जहां बारिश पहले से ही सामान्य स्तर से नीचे रही है।
सितंबर में भी बड़े सुधार के संकेत नहीं
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि IMD के मौजूदा आकलन में सितंबर तक मानसून में किसी बड़े सुधार के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। यानी बारिश की कमी जल्द खत्म होने की संभावना कम है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून सीजन के बाकी हिस्से में बारिश का प्रदर्शन क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग रह सकता है। कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हो सकती है। लेकिन इससे देशव्यापी बारिश की कमी पूरी होने की संभावना कम है।
क्यों महत्वपूर्ण है मानसून का यह आंकड़ा?
भारत में मानसून का सीधा संबंध कृषि, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। सामान्य से कम बारिश होने पर फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा जलाशयों में पानी की उपलब्धता और कई क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
फिलहाल देश में 548.2 मिमी बारिश के मुकाबले सामान्य 635.4 मिमी बारिश का आंकड़ा मानसून की कमजोरी को साफ तौर पर दिखाता है। 14 फीसदी की मौजूदा कमी के आने वाले दिनों में और बढ़ने की IMD की चेतावनी के कारण सितंबर तक मानसून पर नजर बनी रहेगी।
बड़ी बातें
मानसून में गिरावट (कमजोरी): भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि भारतीय मानसून उस समय कमजोर हो रहा है जब इसे सबसे ज्यादा सक्रिय होना चाहिए। अगले कम से कम दो हफ्तों (2 सितंबर तक) तक देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
बारिश की कमी: शनिवार यानी 29 अगस्त तक देश में औसत से 14% कम बारिश दर्ज की गई है (548.2 मिमी बारिश हुई है। जबकि औसत 635.4 मिमी होनी चाहिए थी)। IMD के अनुसार यह कमी आगे और बढ़ सकती है।
सूखेनका खतरा: निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट (Skymet) ने अपने अनुमान में भारी कटौती करते हुए कुल मौसमी बारिश केवल 85% होने का अनुमान जताया है। एजेंसी ने 70% सूखे की आशंका जाहिर की है।
फसलों पर असर: अगस्त और सितंबर में मानसून की इस सुस्ती का सीधा नकारात्मक असर मध्य भारत में रबी (सर्दियों की) और खरीफ फसलों की बुआई व उत्पादन पर पड़ सकता है।
क्षेत्रवार स्थिति
हिमालयी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र: मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) हिमालय की तलहटी में बना हुआ है। इससे केवल हिमालयी बेल्ट, उत्तर-पूर्व और पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
मध्य और प्रायद्वीपीय भारत (Peninsular India): देश के बाकी अधिकांश हिस्सों, विशेषकर मध्य और दक्षिणी भारत में मानसून सुस्त रहेगा।
बंगाल की खाड़ी में दबाव: उत्तर बंगाल की खाड़ी में अगले 24 घंटों में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हो सकती है।