Monsoon Arrives In Kerala News: देशभर में भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ बिजली की मांग के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) ने आज यानी 4 जून को केरल के तट पर दस्तक दे दी है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून को केरल पहुंचता है। इस लिहाज से देखें तो इस बार यह 3 दिन की देरी से भारत पहुंचा है। मानसून की ये दस्तक भारत की करीब 4 ट्रिलियन डॉलर (4 लाख करोड़ डॉलर) की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी का काम करेगा।
मौसम विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने तेजी से आगे बढ़ते हुए आज केरल और माहे के साथ-साथ देश के कई अन्य हिस्सों को कवर कर लिया है। आज 4 जून को मानसून पूरे लक्षद्वीप द्वीप समूह, केरल, माहे, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के शेष बचे हुए हिस्से, पश्चिम-मध्य और पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्से, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्से के साथ कोमोरिन क्षेत्र के बचे हिस्से, दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य एवं उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्से को कवर कर लिया है। फिलहाल मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) मंगलुरु, उथगमंडलम (ऊटी), कोडाईकनाल और थूथुकुडी से होकर गुजर रही है।
अगले 2-3 दिनों का पूर्वानुमान
आईएमडी के मुताबिक आने वाले 2-3 दिनों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। यह जल्द ही मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों, पूरे गोवा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, कर्नाटक के बचे हुए इलाकों, पूरे तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में दस्तक दे देगा।
भारत की $4 ट्रिलियन इकॉनमी के लिए क्यों लाइफलाइन है मानसून?
एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत के लिए यह जून से सितंबर के दौरान होने वाली मानसूनी बारिश किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। इसे कुछ ऐसे समझा जा सकता है:-
70% पानी की जरूरत होती है पूरी
भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए यह मानसून इसलिए जरूरी है क्योंकि यह देश की सालाना 70% बारिश की जरूरत को अकेले पूरा करता है। यही पानी हमारे वाटर रिजर्वायर्स, बांधों और भूजल स्तर को दोबारा रिचार्ज करता है।
खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
भारत की लगभग आधी कृषि भूमि सिंचाई के लिए सीधे तौर पर मानसूनी बारिश पर निर्भर है। मानसून के आने से ही किसान खरीफ फसलों जैसे धान (चावल), मक्का, कपास, सोयाबीन और गन्ना की बुवाई शुरू कर पाते हैं। अगर खेती अच्छी होती है तो ग्रामीण भारत में मांग बढ़ती है। इससे ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन, एफएमसीजी (FMCG) और अन्य कंज्यूमर सामानों की बिक्री को रफ्तार मिलती है।
महंगाई कंट्रोल में रहती है
समय पर और अच्छी बारिश होने से देश में खाद्यान्न उत्पादन मजबूत होता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं। अगर मानसून कमजोर हो जाए तो देश में दालें, सब्जियां और अनाज महंगे हो जाते हैं, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ती है और रिजर्व बैंक (RBI) को ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ती हैं। इससे पूरी विकास दर को प्रभावित होती है।
11 साल में सबसे कम बारिश का अनुमान: इस बार चिंताएं भी बड़ी हैं
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पिछले महीने अपने दीर्घकालिक पूर्वानुमान में सचेत किया था कि साल 2026 में अल नीनो (El Nino) के कमजोर प्रभाव के चलते मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल देश में पिछले 11 वर्षों में सबसे कम बारिश दर्ज होने की आशंका है। इस पूर्वानुमान ने पहले ही सरकार और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
कम बारिश होने की स्थिति में फसलों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इससे देश में खाद्य कीमतों में उछाल और आर्थिक विकास दर में सुस्ती देखने को मिल सकती है। यही वजह है कि 3 दिन की देरी से ही सही, लेकिन केरल में मानसून का पहुंचना भारतीय बाजार और देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।