Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्ती और बारिश में हो रही देरी ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। पानी की कमी और रूठे मानसून की वजह से इस क्षेत्र के आठ जिलों में खरीफ की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक मराठवाड़ा में बुवाई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले महज 2 प्रतिशत रह गया है। सूखे की मार झेलने वाले इस इलाके के किसानों और प्रशासन के लिए बारिश और बुवाई का यह आंकड़ा बेहद डराने वाला है।
बुवाई के आंकड़े: 10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले सिर्फ 1 लाख हेक्टेयर
मराठवाड़ा मध्य महाराष्ट्र का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। यहां की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पीटीआई ने एक रिपोर्ट को कोट करते हुए बताया है कि यहां बारिश में देरी से बुवाई के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट आई है। इस साल 18 जून तक पूरे क्षेत्र में अब तक केवल 1.07 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर ही बुवाई हो पाई है। पिछले साल इसी दिन तक यह आंकड़ा 10.77 लाख हेक्टेयर था। पिछले पांच वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में औसतन लगभग 49.72 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसलें बोई जाती रही हैं। आंकड़ों से साफ है कि पिछले साल 18 जून तक जितनी बुवाई हुई थी, उसकी तुलना में इस साल अब तक केवल 2 प्रतिशत ही बुवाई हो सकी है।
जिलावार बुवाई का हाल (बीड सबसे आगे, लातूर सबसे पीछे)
मराठवाड़ा के कुल आठ जिले (छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, परभणी, हिंगोली और नांदेड़) बारिश की इस देरी का सीधा खामियाजा भुगत रहे हैं। इन 1.07 लाख हेक्टेयर में से आधी से ज्यादा बुवाई (68,572 हेक्टेयर) अकेले बीड जिले में हुई है। दूसरे जिले अपने ऐतिहासिक स्तर से मीलों पीछे हैं। उदाहरण के तौर पर छत्रपति संभाजीनगर में पिछले साल इसी अवधि में 1.64 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी जबकि इस साल यहां सिर्फ 3072 हेक्टेयर में ही फसल बोई जा सकी है।
बारिश और जलाशयों का गहराता संकट
बुवाई में इस भयंकर गिरावट का सीधा कारण बारिश का न होना और जलाशयों में पानी की कमी है। एक अधिकारी के मुताबिक, जून महीने में मराठवाड़ा में औसतन 98.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, लेकिन 18 जून तक इस क्षेत्र में अपने सामान्य कोटे की मात्र 42.7% बारिश (यानी सिर्फ 42.7 मिमी) ही दर्ज की गई है। मराठवाड़ा में मौजूद 11 प्रमुख मेगा प्रोजेक्ट्स (बांधों) में जल स्तर लगातार गिर रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक इन बांधों में सिर्फ 60.84 टीएमसी (Thousand Million Cubic Feet - tmc) पानी बचा था, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 67.35 टीएमसी था।