Monsoon Watch: भीषण गर्मी और उमस से परेशान उत्तर और मध्य भारत के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अलर्ट के मुताबिक मानसून ने मध्य प्रदेश के इंदौर, उत्तर प्रदेश-बिहार के सीमावर्ती इलाके मोतिहारी और गुजरात के सूरत को पार करते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने अब यह भी साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों का इंतजार कब खत्म होगा और इन राज्यों में मानसून की एंट्री कब होने जा रही है। आइए जानते हैं मानसून को लेकर आईएमडी का ताजा अपडेट और देश में इसकी मौजूदा स्थिति।
इन इलाकों को कवर करते हुए आगे बढ़ा मानसून
आईएमडी की रिपोर्ट के मुताबिक 24 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूर्वोत्तर अरब सागर, गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों में अपनी दस्तक दे दी है। इसके साथ ही मानसून ने महाराष्ट्र के बचे हुए हिस्सों और छत्तीसगढ़ व झारखंड के कुछ और इलाकों को भी पूरी तरह कवर कर लिया है। वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज, मोतिहारी और 28।3°N/83°E से होकर गुजर रही है।
यूपी और उत्तराखंड में कब आएगा मानसून?
मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए जो पूर्वानुमान जारी किया है उसके मुताबिक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मानसून की एंट्री की तारीखें भी अब साफ होने लगी हैं। आईएमडी के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों के भीतर मानसून के उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, गुजरात, मध्य प्रदेश के कुछ और इलाकों और छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। इसके ठीक बाद यानी अगले 2-3 दिनों में मानसून उत्तर प्रदेश के कई और हिस्सों में अपनी पकड़ मजबूत कर लेगा। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के लिए भी राहत की खबर है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिनों के बाद वाले चरण में मानसून उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी प्रवेश कर जाएगा।
मुंबई में 13 दिन की देरी से पहुंचा मानसून, सामान्य जनजीवन
इससे ठीक एक दिन पहले 23 जून को मानसून ने मुंबई में दस्तक दी थी। मुंबई में इस बार मानसून अपनी सामान्य शुरुआत की तारीख (10 जून) से 13 दिन की देरी से पहुंचा है। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक इससे पहले साल 2023 में मानसून और भी देरी से यानी 25 जून को मुंबई पहुंचा था। वहीं मुंबई में मानसून के सबसे लंबे समय तक लेट होने का रिकॉर्ड साल 1974 और 1958 का है। तब मानसून 28 जून को वहां पहुंचा था।
मानसून की एंट्री के साथ मुंबई के नायर अस्पताल में सबसे अधिक 78.96 मिमी बारिश दर्ज की गई, इसके बाद एन एम जोशी मार्ग-लोअर परेल में 78.4 मिमी और परेल टीटी में 72.63 मिमी बारिश दर्ज हुई। पश्चिमी उपनगर के मलाड बस डिपो में 61.8 मिमी और पूर्वी उपनगर मानखुर्द के महाराष्ट्रनगर में 51.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के बावजूद मुंबई में सभी प्रमुख सबवे खुले रहे, लोकल ट्रेन, बेस्ट बसें और ट्रैफिक सामान्य रूप से चलता रहा, हालांकि मुख्य सड़कों पर थोड़ा ट्रैफिक जाम जरूर देखा गया।
कमजोर मानसून से निपटने के लिए सरकार की आकस्मिक योजना तैयार
भले ही मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन शुरुआती सुस्ती के कारण इस सीजन में अब तक औसत से लगभग 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 2 जुलाई को समाप्त होने वाले सप्ताह तक बारिश के कमजोर रहने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने इस साल अल नीनो के असर की वजह से पिछले 11 वर्षों में सबसे कम बारिश होने का अनुमान भी जताया था।
भारत में करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है, इसलिए मानसून का समय पर आना बेहद महत्वपूर्ण है। कमजोर मानसून के इस खतरे को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर 300 से अधिक संवेदनशील जिलों के लिए आकस्मिक योजना तैयार की है।
सरकार ने कुल 315 जिलों में से 111 जिलों को हाई प्रायोरिटी में रखा है, क्योंकि यहां की एक चौथाई से भी कम कृषि भूमि सिंचित है। वहीं 76 जिलों को मीडियम प्रायोरिटी में वर्गीकृत किया गया है। राज्यों को सलाह दी गई है कि वे वर्षा आधारित क्षेत्रों के किसानों को कम पानी की खपत वाली और कम समय में तैयार होने वाली फसलों जैसे दालें, बाजरा और तिलहन उगाने के लिए प्रोत्साहित करें।
कृषि मंत्री ने राज्यों से तालाबों, चेक डैमों और अन्य जल संचयन संरचनाओं की मरम्मत करने तथा जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए कहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भले ही कमजोर मानसून से कृषि आय पर थोड़ा असर पड़ सकता है लेकिन भारत के पास चावल और गेहूं जैसी मुख्य खाद्य सामग्रियों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, इसलिए देशवासियों को खाद्य सुरक्षा को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।