दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले कुछ दिनों में मानसून के उत्तर और मध्य भारत के कई अन्य हिस्सों तक पहुंचने के लिए मौसम पूरी तरह अनुकूल बना हुआ है। इसके बावजूद दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जो आमतौर पर जून के आखिर में देखने को मिलती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मानसून पहुंच चुका है, तो फिर बारिश क्यों नहीं हो रही?
दरअसल, मानसून का किसी क्षेत्र में पहुंचना और वहां लगातार बारिश होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। अच्छी बारिश तभी होती है, जब बारिश कराने वाली मौसम प्रणालियां पूरी तरह सक्रिय हो जाती हैं। फिलहाल यही सिस्टम कई इलाकों में पूरी तरह सक्रिय नहीं हुए हैं, इसलिए मानसून आने के बावजूद व्यापक बारिश नहीं हो रही है।
मानसून के किसी इलाके में पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि वहां तुरंत तेज बारिश शुरू हो जाएगी। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार कई मौसम संबंधी कारणों पर निर्भर करती है। इनमें हवा की दिशा, वातावरण में नमी और बड़े इलाके में लगातार बारिश जैसी स्थितियां शामिल होती हैं। इसलिए यह जरूरी नहीं है कि किसी राज्य के हर जिले में एक साथ बारिश हो। कई बार मानसून राज्य में पहुंच जाता है, लेकिन कई शहरों में कुछ दिनों तक गर्मी, उमस और सूखा मौसम बना रहता है।
हाल ही में जारी INSAT-3DS उपग्रह की तस्वीरों में भी यही स्थिति दिखाई दी है। मध्य भारत, बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में घने बादल नजर आ रहे हैं। वहीं दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश इलाकों में अभी भी आसमान काफी हद तक साफ दिखाई दे रहा है।
उत्तर भारत में अभी तक अच्छी बारिश क्यों नहीं हो रही?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में व्यापक बारिश नहीं होने की सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी के ऊपर मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर सिस्टम) नहीं बनना है। यही सिस्टम मानसून को मजबूत करता है और समुद्र से नमी लेकर देश के अंदरूनी इलाकों तक पहुंचाता है। इसके कारण मध्य और उत्तर भारत में अच्छी बारिश होती है।
जब ऐसा सिस्टम सक्रिय नहीं होता, तो नमी वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं भी कमजोर पड़ जाती हैं। ऐसे में लगातार बारिश होने की बजाय केवल कुछ जगहों पर आंधी, गरज-चमक और हल्की या छिटपुट बारिश होती है। यानी, मानसून उत्तर भारत तक पहुंच चुका है, लेकिन अच्छी और व्यापक बारिश के लिए जरूरी मौसम प्रणाली अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई है। इसी वजह से कई इलाकों में लोग अब भी तेज बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
जुलाई में फिर जोर पकड़ सकता है मानसून
मौसम के अनुमान बताते हैं कि जुलाई की शुरुआत में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा सूखा मौसम ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भूमध्य रेखा के उत्तर में पूर्वी हिंद महासागर के ऊपर एक बड़ा मौसम तंत्र विकसित हो रहा है। उम्मीद है कि यह अगले 4 से 7 दिनों में बंगाल की खाड़ी तक पहुंच जाएगा। इसके बाद मानसून को मजबूती मिलेगी और बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का नया क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे देश के कई हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है।
इसके अलावा, मौसम वैज्ञानिक पश्चिमी भारत के ऊपर बनने वाले एक विशेष मौसम तंत्र पर भी नजर बनाए हुए हैं। यदि यह सक्रिय होता है, तो महाराष्ट्र, गुजरात और आसपास के राज्यों में अच्छी और तेज बारिश देखने को मिल सकती है।