Monsoon Updates: मानसून की रफ्तार पर लगा ब्रेक! मौसम विभाग ने बताया क्यों रूठ गए बादल, अब इस तारीख से होगी झमाझम बारिश

Monsoon Updates: मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि बड़े पैमाने पर बादलों की हलचल (जैसे मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन या MJO) भी फिलहाल मानसून को आगे बढ़ाने का कोई मजबूत संकेत नहीं दे रही है। मौसम विभाग ने मानसून के रुकने के पीछे मुख्य रूप से चार कारण बताए हैं

अपडेटेड Jun 18, 2026 पर 2:23 PM
Monsoon Updates: मानसून की रफ्तार पर लगा ब्रेक! मौसम विभाग ने बताया क्यों रूठ गए बादल, अब इस तारीख से होगी झमाझम बारिश

महाराष्ट्र के लोगों के लिए मौसम विभाग से एक बड़ी और थोड़ी चिंताजनक खबर आ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को बताया कि पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में मानसून का आगे बढ़ना पूरी तरह थम गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, हवाओं और मौसम के मिजाज में कोई बड़ा अनुकूल बदलाव न होने के कारण मानसून की चाल सुस्त पड़ गई है।

IMD मुंबई की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, दक्षिण पश्चिम मानसून ने बीते 8 जून को दक्षिण कोंकण और उससे सटे दक्षिण मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी थी। लेकिन, उसके बाद से इसकी प्रोग्रेस रुक गई है।

क्यों अटक गया मानसून?


मौसम विभाग ने मानसून के रुकने के पीछे मुख्य रूप से ये चार कारण बताए हैं:

  1. अरब सागर से नहीं मिल रही ताकत: इस समय मानसून की हवाओं को अरब सागर से वो मजबूत 'धक्का' नहीं मिल पा रहा है, जो हवा में नमी बढ़ाने और भारी बारिश लाने के लिए जरूरी होता है।
  2. कमजोर पड़ीं हवाएं: अरब सागर के ऊपर चलने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर हो गई हैं। इस वजह से वे महाराष्ट्र के तटीय और अंदरूनी इलाकों की तरफ पर्याप्त नमी नहीं ला पा रही हैं।
  3. समुद्री हलचल शांत: हिंद महासागर और अरब सागर के ऊपर से जो हवाएं नमी लेकर आती हैं, वे पिछले कुछ दिनों में सुस्त पड़ गई हैं।
  4. कोई बड़ा सिस्टम नहीं बना: इस समय न तो अरब सागर और न ही बंगाल की खाड़ी में कोई कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) या चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) बना है, जो मानसून को आगे खींच सके। यहां तक कि पश्चिमी तट पर बनने वाली मौसमी पट्टी (Offshore Trough) भी इस समय गायब है।

अगले 4-5 दिन कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि बड़े पैमाने पर बादलों की हलचल (जैसे मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन या MJO) भी फिलहाल मानसून को आगे बढ़ाने का कोई मजबूत संकेत नहीं दे रही है। इसका नतीजा यह होगा कि अगले 4 से 5 दिनों तक महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में सिर्फ इक्का-दुक्का जगहों पर ही हल्की या छिटपुट बारिश देखने को मिलेगी।

राहत की खबर: इस दिन से फिर बरसेंगे बादल

भले ही अगले कुछ दिन सूखे गुजरने वाले हों, लेकिन मौसम विभाग ने एक अच्छी खबर भी दी है। कंप्यूटर वेदर मॉडल (Numerical Weather Guidance) के संकेतों के मुताबिक, 24 और 25 जून के आसपास कोंकण के इलाकों में एक बार फिर से बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी।

मौसम विभाग लगातार पल-पल बदलते हालातों पर नजर बनाए हुए है, ताकि जैसे ही कोई नया सिस्टम बने और मानसून आगे बढ़े, लोगों तक तुरंत जानकारी पहुंचाई जा सके। तब तक महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों को मानसूनी फुहारों के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।

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