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बंगाल SIR के आखिरी दिन भी 5 लाख से ज्यादा वोटर नहीं पहुंचे सुनवाई में, अब कटेंगे नाम या मिलेगी राहत?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन अनुपस्थित मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में रहेंगे या हटाए जाएंगे? चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब अगला चरण शुरू होने जा रहा है। आयोग के अनुसार, 15 फरवरी से जांच प्रक्रिया शुरू होगी, जो करीब 7 दिनों तक चलेगी। इस दौरान यह तय किया जाएगा कि किन नामों को अंतिम मतदाता सूची में रखा जाएगा और किन्हें बाहर किया जाएगा। यही वजह है कि राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है

Suresh Kumarअपडेटेड Feb 14, 2026 पर 10:00 PM
बंगाल SIR के आखिरी दिन भी 5 लाख से ज्यादा वोटर नहीं पहुंचे सुनवाई में, अब कटेंगे नाम या मिलेगी राहत?
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की सुनवाई शनिवार (14 फरवरी) को खत्म हो गई

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की सुनवाई शनिवार (14 फरवरी) को खत्म हो गई, लेकिन आखिरी दिन भी करीब 5 लाख मतदाता सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए। यह प्रक्रिया पहले 7 फरवरी को समाप्त होने वाली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद चुनाव आयोग ने इसकी समयसीमा बढ़ाकर 14 फरवरी कर दी थी। CEO कार्यालय का कहना है कि, अतिरिक्त समय मिलने के बावजूद लाखों लोग अपनी सुनवाई के लिए सामने नहीं आए। जिलावाइज आंकड़ों की बात करें तो उत्तर 24 परगना में सबसे ज्यादा अनुपस्थित मतदाता पाए गए हैं। इसके बाद दक्षिण 24 परगना, दक्षिण कोलकाता और उत्तर कोलकाता का स्थान आता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन अनुपस्थित मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में रहेंगे या हटाए जाएंगे? चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब अगला चरण शुरू होने जा रहा है। आयोग के अनुसार, 15 फरवरी से जांच प्रक्रिया शुरू होगी, जो करीब 7 दिनों तक चलेगी। इस दौरान यह तय किया जाएगा कि किन नामों को अंतिम मतदाता सूची में रखा जाएगा और किन्हें बाहर किया जाएगा। यही वजह है कि राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

राजनीतिक दलों को आशंका है कि बड़ी संख्या में नाम कटने से आगामी विधानसभा चुनाव पर सीधा असर पड़ सकता है। तृणमूल कांग्रेस पहले से ही आरोप लगा चुकी हैं कि SIR प्रक्रिया के जरिए वैध वोटरों को बाहर करने की कोशिश हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों ने सुनवाई में हिस्सा नहीं लिए है। उनके दस्तावेज या सत्यापन में अगर कमी पाई गई, तो उनके नाम अंतिम सूची से हट सकते हैं। इससे कई विधानसभा क्षेत्रों में वोटरों की संख्या घट सकती है। आने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह SIR प्रक्रिया बेहद अहम मानी जा रही है। एक तरफ चुनाव आयोग फर्जी और डुप्लीकेट वोट हटाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इसे चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

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