सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर में हिंदुओं को पूजा और मुसलमानों को नमाज अदा करने की अनुमति दे दी है। हिंदू समुदाय के सदस्यों को हिंदू त्योहार बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना करने की अनुमति दी गई है, जो इस साल शुक्रवार को पड़ रहा है, जबकि मुसलमान दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक अपनी शुक्रवार की नमाज अदा कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या जिला प्रशासन को बतानी होगी। कोर्ट ने जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था के इंतजाम करने का भी निर्देश दिया।
अदालत हिंदू संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने का विशेष अधिकार देने की मांग की गई थी।
HFJ की ओर से याचिका वकील विष्णु शंकर जैन की तरफ से 2 जनवरी को दायर की गई और अदालत के सामने तत्काल सुनवाई के लिए रखी गई था। याचिका में कहा गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के आदेश में उन स्थितियों का जिक्र नहीं है, जहां बसंत पंचमी शुक्रवार की नमाज के साथ पड़ती है। उन्होंने 23 जनवरी को पूरे दिन हिंदुओं के लिए एकांत और निर्बाध पूजा-अर्चना के अधिकार की मांग की।
2003 के ASI आदेश के अनुसार, मुसलमानों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच उस स्थान पर शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति है, जबकि हिंदुओं को बसंत पंचमी पर पारंपरिक अनुष्ठान करने की अनुमति है और उन्हें हर मंगलवार को स्पेशल एंट्री दी गई है। हालांकि, इसमें उन सालों के लिए कोई व्यवस्था निर्दिष्ट नहीं है जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है।