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Mumbai-Ahmedabad Bullet Train: बुलेट ट्रेन की रफ्तार से नहीं होगी कोई धमाकेदार आवाज! इसमें लग रही टनल हुड टेक्नोलॉजी

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल मार्ग में महाराष्ट्र में सात और गुजरात में एक पहाड़ी सुरंग है। परियोजना के निर्माण के दौरान इंजीनियर ऐसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल दुनिया के कई उन्नत हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में किया जाता है। इसका उद्देश्य यात्रियों को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा अनुभव देना है

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Jun 14, 2026 पर 2:57 PM
Mumbai-Ahmedabad Bullet Train: बुलेट ट्रेन की रफ्तार से नहीं होगी कोई धमाकेदार आवाज! इसमें लग रही टनल हुड टेक्नोलॉजी
भारत की पहली हाई-स्पीड रेल यानी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम काफी तेजी से हो रहा है।

Mumbai-Ahmedabad Bullet Train: भारत की पहली हाई-स्पीड रेल यानी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम काफी तेजी से हो रहा है। वहीं अब इस परियोजना में भारत ने एक नई तकनीक ‘टनल हुड’ का इस्तेमाल शुरू किया है। यह देश के हाई-स्पीड रेल कार्यक्रम के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, किसी रेल परियोजना में इस तकनीक का इस्तेमाल भारत में पहली बार किया जा रहा है। इसे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के उन हिस्सों में लगाया जा रहा है जहां पहाड़ों के बीच सुरंगें (टनल) बनाई गई हैं। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरता है।

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल मार्ग में महाराष्ट्र में सात और गुजरात में एक पहाड़ी सुरंग है। परियोजना के निर्माण के दौरान इंजीनियर ऐसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल दुनिया के कई उन्नत हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में किया जाता है। इसका उद्देश्य यात्रियों को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा अनुभव देना है। ‘टनल हुड’ भी ऐसी ही एक आधुनिक तकनीक है। माना जा रहा है कि बुलेट ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद यह तकनीक यात्रा को और अधिक सुगम, सुरक्षित और आरामदायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

क्या है 'टनल हुड'

जब कोई बुलेट ट्रेन या तेज रफ्तार ट्रेन किसी टनल में प्रवेश करती है, तो वह अपने सामने मौजूद बड़ी मात्रा में हवा को आगे की ओर धकेलती है। इससे सुरंग के अंदर दबाव की तेज लहरें पैदा होती हैं। यदि इन दबाव लहरों को नियंत्रित नहीं किया जाए, तो ट्रेन के सुरंग से बाहर निकलने पर तेज आवाज़ और कंपन हो सकते हैं। इसी समस्या को कम करने के लिए टनल के प्रवेश द्वार पर विशेष संरचनाएं बनाई जाती हैं, जिन्हें टनल हुड कहा जाता है। ये खुली जगह और सुरंग के बंद हिस्से के बीच एक संक्रमण क्षेत्र का काम करती हैं।

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