महाराष्ट्र के नासिक में Tata Consultancy Services (TCS) के BPO में धर्मांतरण से जुड़े मामले में जांच तेज हो गई है। TCS की कर्मचारी निदा खान को कोर्ट से गिरफ्तारी से अंतरिम राहत नहीं मिली है, जिसके बाद पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है।

महाराष्ट्र के नासिक में Tata Consultancy Services (TCS) के BPO में धर्मांतरण से जुड़े मामले में जांच तेज हो गई है। TCS की कर्मचारी निदा खान को कोर्ट से गिरफ्तारी से अंतरिम राहत नहीं मिली है, जिसके बाद पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, नीदा खान पर आरोप हैं कि जबरन धर्म परिवर्तन कराने में उनकी भी भूमिक है। इस पूरे मामले में अब तक 9 FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से एक में नीदा खान समेत 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि वह इस समय फरार हैं और उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर रही हैं।
इस केस में यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित महिलाएं ज्यादातर 21 से 30 साल की हैं और मिडिल क्लास परिवारों से आती हैं। वे कंपनी में एसोसिएट लेवल पर काम करती थीं और करीब 20,000 रुपए महीने की सैलरी पाती थीं।
कोर्ट ने नीदा खान की अग्रिम जमानत पर सुनवाई 27 अप्रैल तक टाल दी है। क्योंकि अभी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है, इसलिए पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। नीदा खान ने अपनी दो महीने की प्रेग्नेंसी का हवाला देकर गिरफ्तारी से बचाव की मांग की थी।
इस मामले में एक और बड़ा मुद्दा POSH कमेटी को लेकर सामने आया है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि कंपनी की POSH कमेटी में ज्यादातर सदस्य स्थानीय नहीं थे और मीटिंग भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए होती थी। उन्होंने सुझाव दिया कि कमेटी में स्थानीय सदस्य हों और हर तीन हफ्ते में आमने-सामने बैठक हो, ताकि ऐसे मामलों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
FIR के अनुसार, मुख्य आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता को अपने दोस्तों- तौसीफ और नीदा से मिलवाया था। आरोप है कि इन लोगों ने हिंदू धार्मिक मान्यताओं और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, जिससे पीड़िता पर मानसिक दबाव बनाया गया।
पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है, जो सभी 9 मामलों की गहराई से जांच कर रही है।
वहीं, TCS ने बयान जारी कर कहा है कि कंपनी में किसी भी तरह के उत्पीड़न या जबरदस्ती के लिए “जीरो टॉलरेंस” नीति है। आरोपियों को सस्पेंड कर दिया गया है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसे इस मामले में पहले कोई शिकायत अंदरूनी सिस्टम के जरिए नहीं मिली थी।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
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