देश की राजनीति में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का नाम आकाश में उभरने वाले धूमकेतु की तरह अचानक सबके सामने आ गया है। आमतौर पर किसी भी राजनीतिक दल को बड़ा जनाधार बनाने और राजनीति में मजबूत पहचान हासिल करने में कई साल लग जाते हैं, लेकिन नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया अचानक से पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। मात्र एक चुनाव और 822 वोट पाने वाली ये पार्टी अब राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने जा रही है। पार्टी को चंदे के रूप में भी सिर्फ 1.13 लाख रुपये ही प्राप्त हुए थे। इसके बावजूद अब इसकी राजनीतिक किस्मत बदलती हुई दिखाई दे रही है।
शामिल हो सकते हैं 20 सांसद
बता दें कि, पश्चिम बंगाल के पति-पत्नी द्वारा संचालित इस पार्टी को बड़ा फायदा मिल सकता है। यदि लोकसभा अध्यक्ष तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के करीब 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने को मंजूरी दे देते हैं, तो यह पार्टी लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। साथ ही, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में भी यह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने की स्थिति में पहुंच जाएगी।
लोकसभा में बन सकती है पांचवी सबसे बड़ी पार्टी
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 में चुनाव आयोग में रजिस्टर हुई नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हुई बगावत का सबसे बड़ा लाभ उठाती नजर आ रही है। टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने इस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है। यदि इस विलय को मंजूरी मिल जाती है, तो एनसीपीआई लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। वर्तमान में लोकसभा में एनसीपीआई का कोई सांसद नहीं है, लेकिन विलय के बाद इसके सांसदों की संख्या सीधे 20 हो जाएगी। इसके साथ ही यह भारतीय जनता पार्टी (240 सांसद), कांग्रेस (99 सांसद), समाजवादी पार्टी (37 सांसद) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम - डीएमके (22 सांसद) के बाद लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। वहीं, तृणमूल कांग्रेस, जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव में 28 सांसदों के साथ चौथी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के रूप में चुनाव लड़ा था, उसकी ताकत घटकर केवल 9 सांसदों तक सिमट सकती है।
बिना किसी बड़े जनाधार या चुनावी सफलता वाली पार्टी का अचानक संसद में बड़ी ताकत बन जाना भारतीय राजनीति की सबसे अनोखी घटनाओं में से एक माना जा सकता है। आमतौर पर लोकसभा की एक सीट जीतने के लिए वर्षों की मेहनत, मजबूत संगठन और भारी संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में किसी पार्टी का रातों-रात 20 सांसदों वाली पार्टी बन जाना किसी राजनीतिक चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
इकलौते चुनाव में मिले मात्र 822 वोट
हालांकि, राष्ट्रीय राजनीति में अचानक चर्चा में आई नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का चुनावी रिकॉर्ड बेहद सीमित रहा है। चुनाव आयोग ने 20 जनवरी 2023 को इसे एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में दर्ज किया था। पार्टी बनने के बाद अब तक उसने केवल एक चुनाव लड़ा है। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में एनसीपीआई ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे कुल मिलाकर सिर्फ 822 वोट ही मिले थे। चावमानु विधानसभा सीट पर एनसीपीआई को 536 वोट मिले, जबकि कैलाशहर विधानसभा सीट पर पार्टी को केवल 286 वोट हासिल हुए। इस तरह दोनों उम्मीदवारों को मिलाकर पार्टी को कुल 822 वोट मिले। इतने कम वोटों के कारण एनसीपीआई त्रिपुरा चुनाव में सबसे छोटे राजनीतिक दलों में से एक बनकर रह गई थी।
पार्टी को मिला एक लाख का चंदा
एनसीपीआई की आर्थिक स्थिति भी काफी साधारण रही है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक कुल मिलाकर करीब 1.13 लाख रुपये का चंदा मिला है। देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों की तुलना में एनसीपीआई का संगठन काफी छोटा है। इसके पास न तो बड़ा नेटवर्क है, न ही व्यापक जिला इकाइयां और न ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हैं। सीमित संसाधनों और कम पहचान के साथ यह पार्टी काम करती रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों द्वारा एनसीपीआई में शामिल होने का फैसला किए जाने से पहले तक यह पार्टी पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के कुछ राजनीतिक क्षेत्रों के बाहर ज्यादातर लोगों के लिए लगभग अनजान थी।
उत्तिया कुंडू एनसीपीआई के अध्यक्ष हैं। वे बंगाली प्रकाशन 'जागो बिस्वा' से भी जुड़े हुए हैं। अपने परिचय में उन्होंने खुद को प्रकाशक, संपादक, गणितज्ञ, समाजसेवी और प्रेरक वक्ता (मोटिवेशनल स्पीकर) बताया है। उनकी पत्नी शेवली कुंडू पार्टी की कोषाध्यक्ष हैं। उन्हें कुछ अन्य संस्थाओं में भी निदेशक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इनमें 'बिस्वाबाजार प्राइवेट लिमिटेड' और 'पश्चिम बंगाल असंगठित महिला कर्मी एसोसिएशन' जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन संगठनों का पता भी वही बताया जाता है, जहां से पार्टी का संचालन किया जाता है। मई में एक सोशल मीडिया पोस्ट में उत्तिया कुंडू ने सुवेंदु अधिकारी के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की थी। उस पोस्ट में उन्होंने लिखा था, "सपने देखने का समय अब खत्म हो गया है। अब उन्हें पूरा करने का समय है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी की सफलता की यात्रा सफल हो।"